रॉबर्ट्सगंज से शाहगंज होते हुए कलवारी तक स्टेट हाईवे के पहले चरण का टेंडर पास हो गया है। इस फैसले से रॉबर्ट्सगंज के व्यापारियों में भारी विरोध है, जिन्हें हजारों मकानों और दुकानों के हमेशा के लिए गायब होने का डर सता रहा है। यह मामला कोरोना काल से जुड़ा है, जब भाजपा ने रामगढ़-शाहगंज-घोरावल मार्ग को स्टेट हाईवे घोषित किया था। उस समय शाहगंज, रॉबर्ट्सगंज, रामगढ़ और खलियारी के व्यापारियों ने इसका कड़ा विरोध किया था, क्योंकि उन्हें पूरी तरह बर्बाद होने का डर था। व्यापारियों की नाराजगी को देखते हुए, भाजपा ने नगर के बाहर से बाईपास बनवाने का आश्वासन दिया था। हालांकि, विधानसभा और नगरपालिका चुनाव बीत जाने के बाद भी कोई बाईपास स्वीकृत नहीं हुआ। आरोप है कि भाजपा ने केवल चुनावी लाभ के लिए तीन बार नए-नए रास्तों से बाईपास का सपना दिखाया। हकीकत में, इससे व्यापारियों की समस्या हल नहीं हुई। बल्कि, सत्ता से जुड़े प्लाटरों ने मौके का फायदा उठाया और बाईपास के नाम पर जमीनों की प्लाटिंग कर उन्हें बेच दिया। कुछ समय पहले यह जानकारी सामने आई कि बाईपास स्वीकृत नहीं हुआ है। अब पहले चरण के स्टेट हाईवे का टेंडर पास होने से रॉबर्ट्सगंज के व्यापारियों का कहना है कि हजारों मकान और दुकानें हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी। नजूल भूमि के कारण सैकड़ों लोग मुआवजा भी नहीं पा सकेंगे। व्यापारियों का आरोप है कि भाजपा ने उन्हें केवल वोट बैंक माना है और इस स्थिति के लिए वही जिम्मेदार है। वही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व सथर विधायक अविनाश कुशवाहा ने घोषणा की है कि वह व्यापारियों की इस लड़ाई को मजबूती से लड़ेगी।
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