हरदोई में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) के बाद सामने आए आंकड़ों ने जिले की आठों विधानसभाओं में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। जनपद में कुल 5,44,682 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह संख्या प्रत्येक विधानसभा में भाजपा प्रत्याशियों की पिछली जीत के अंतर से कहीं अधिक है, जिससे आगामी चुनावों के समीकरण बदलने की संभावना है। सबसे अधिक प्रभाव हरदोई सदर विधानसभा में देखा गया है। 2022 के चुनाव में नितिन अग्रवाल ने यहां 43,148 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। हालांकि, इस बार इस विधानसभा से 1,11,107 नाम काटे गए हैं, जो जीत के अंतर का ढाई गुना से भी अधिक है। हटाए गए नामों में 15,567 मृतक और 37,283 गैरहाजिर (Absent) श्रेणी के मतदाता शामिल हैं। अन्य विधानसभाओं में भी यही प्रवृत्ति देखने को मिली है। सवायजपुर में 26,060 के जीत के अंतर के मुकाबले 66,329 नाम हटाए गए, जबकि संडीला में 37,123 के मुकाबले 71,613 नाम काटे गए। बालामऊ में 26,581 के अंतर के सामने 65,467 नाम हटे, और बिलग्राम-मल्लावां में 25,577 के अंतर के मुकाबले 66,359 नाम हटाए गए। शाहाबाद और गोपामऊ जैसी विधानसभा सीटों पर जहां 2022 में जीत का अंतर क्रमशः 7,815 और 8,276 वोटों का था, वहां भी 55,000 से अधिक नाम सूची से हटाए गए हैं। यह स्थिति जीतने और हारने वाले दोनों प्रत्याशियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सत्ता पक्ष के विधायकों ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बताया है। मंत्री नितिन अग्रवाल ने कहा है कि “फर्जी और मृतक मतदाताओं को सूची से हटाना चुनाव आयोग की एक आवश्यक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है। मैपिंग और ‘जिंदा’ मृतकों का पेंच जिले में 2,25,940 मतदाता ऐसे हैं जो मैपिंग सूची में हैं। ये लोग जीवित तो हैं लेकिन 2003 के डेटा से मैप नहीं हैं। अब इन्हें खुद को ‘जिंदा’ साबित करने के लिए साक्ष्य देने होंगे, अन्यथा इनकी वोट देने की शक्ति खत्म हो जाएगी। कुल मिलाकर, 5.44 लाख कटे हुए वोट हरदोई की सियासत में नया मोड़ लाने वाले हैं।
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