संभल विद्युत विभाग को पिछले एक साल में चलाए गए अभियान से 51 करोड़ रुपये का राजस्व लाभ हुआ है। इस दौरान बिजली चोरी के कुल 6,526 मामले दर्ज किए गए हैं। विभाग ने 50 प्रतिशत से अधिक लाइन लॉस वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष अभियान चलाए हैं। अब तक 155 किलोमीटर आर्म्ड केबल बिछाई जा चुकी है, और अन्य क्षेत्रों में भी इसे बिछाने की योजना है ताकि बिजली चोरी पर अंकुश लगाया जा सके। संभल विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता हिमांशु वार्ष्णेय ने बताया कि अभियान से पहले संभल टाउन में स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान करने से कतराते थे और विभाग के कर्मचारियों को अक्सर विरोध का सामना करना पड़ता था, जिससे उन क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। उन्होंने कहा कि अब प्रशासन के सहयोग से स्थिति में काफी सुधार हुआ है। श्री वार्ष्णेय के अनुसार, एलटी और आर्म्ड केबल बिछाने तथा 50,000 स्मार्ट मीटर स्थापित करने से बिजली चोरी पर प्रभावी रोक लगी है। इन उपायों से 100 मिलियन यूनिट बिजली की बचत हुई है, जिससे विभाग को प्रत्यक्ष रूप से 60 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। बिलिंग आवृत्ति बढ़ने से 51 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिला। दर्ज किए गए 6,526 चोरी के मामलों में 35 करोड़ रुपये का आकलन किया गया था। विगत वर्षों की तुलना में विभाग को कुल 181 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। बिजली चोरी में कमी आने से ट्रांसफार्मर क्षति के मामलों में भी गिरावट आई है। कस्बा गुन्नौर और कैथल में भी उच्च लाइन हानियों को कम करने के लिए प्रशासन के सहयोग से अभियान चलाए जा रहे हैं। जनपद संभल का कुल लाइन लॉस जो पहले 34 से 40 प्रतिशत था, अब घटकर 27 प्रतिशत रह गया है, जो विगत वर्षों की तुलना में 12 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
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