जालौन में सड़क हादसे में 3 दोस्तों की मौत हो गई। भागवत कथा के भंडारे से घर लौटते वक्त उनकी बाइक बिजली के खंभे से टकरा गई। तीनों एक ही बाइक पर थे। उन्होंने हेलमेट भी नहीं पहन रखा था। बाइक की रफ्तार इतनी तेज थी कि टक्कर के बाद उसके परखच्चे उड़ गए। अगला हिस्सा चकनाचूर हो गया। तीनों उछलकर 10 फीट दूर गिरे। रात के वक्त रास्ता सुनसान होने की वजह से तीनों करीब एक घंटे तक तड़पते रहे। जिसके बाद दम तोड़ दिए। पोस्टमार्टम होने के बाद तीनों का शव पहुंचा तो पूरा गांव गमगीन हो गया। इसके बाद, बुधवार की रात को अंतिम संस्कार कर दिया गया। अब जानिए पूरा मामला सिरसा कलार थाना क्षेत्र के हंथना बुजुर्ग गांव के रहने वाले अंशुमान परिहार (18) पुत्र संतराम, अंकित साकवार (17) पुत्र कमलेश और कृष्ण कुमार विश्वकर्मा (17) पुत्र सुनील मंगलवार शाम 7 बजे घर से एक किलोमीटर दूर गधेला गांव गए थे। जहां तीनों 11 कुंडीय यज्ञ-भागवत कथा के भंडारे में शामिल हुए। रात करीब 9 बजे तीनों टीवीएस रेडर बाइक से लौट रहे थे। गाड़ी अंशुमान चला रहा था। उसने हेलमेट नहीं पहन रखा था। जल्दी घर पहुंचने के लिए काफी रफ्तार में बाइक चला रहा था। इस दौरान बाइक सड़क पर गड्ढे से उछलकर बिजली के पोल से टकरा गई। तीनों दूर जा गिरे। उनके चेहरे और सिर पर गंभीर चोटें आईं। जिससे तीनों की मौत हो गई। अंकित करना चाहता था पुलिस की नौकरी अंकित शाक्यवार के पिता कमलेश वर्मा ने बताया- घर में सबसे बड़ा बेटा था और सिरसा कलार में बने जनता इंटर कॉलेज में कक्षा 9 वीं में पढ़ाई कर रहा था। वह पढ़ने में ठीक था और घर में सभी से कहता था कि वह हाईस्कूल की परीक्षा पास करने के बाद पुलिस की भर्ती देखेगा, लेकिन किसी को यह पता नहीं था कि उसकी इच्छा से पहले ही सांसे थम जाएगी। अंकित के चाचा रवि शंकर भतीजे की मौत से सदमे में है, वह घटना को बताते बताते अचानक रोने लगे। उन्होंने बताया कि उनका भतीजा घर में सबसे बड़ा था, उन्होंने कहा कि उसका सपना था कि वह भी पुलिस में जाए, लेकिन अब उसका सपना, सपना ही रह गया। खराब सड़क ने उसकी जान ले ली। परिवार का हाथ बटाटा था कृष्ण कुमार इसी हादसे में जान गंवाने वाले सुनील के 17 वर्षीय पुत्र कृष्ण कुमार अपने पिता की दुकान पर बैठकर साथ देता था, कृष्ण कुमार ने कक्षा नवमी तक पढ़ाई की थी, उसके बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी थी, मगर घर की स्थिति को देखते हुए उसने पिता का साथ देना शुरू कर दिया था, लेकिन किसी को यह पता नहीं था कि मंगलवार की रात उसकी आखिरी रात होगी। हाथ बंटाते थे। अंशुमान दिल्ली में करता था प्राइवेट जॉब इसी सड़क हादसे में जान गंवाने वाला तीसरा युवक अंशुमान पुत्र संतराम तीन बहन और तीन भाइयों में चौथे नंबर का था, परिवार की स्थिति को देखते हुए भी उसने भी कक्षा 8 तक पढ़ाई की थी मगर हुआ है मजदूरी और प्राइवेट कंपनी में काम करके परिवार का साथ दे रहा था, जिससे बहनों की शादी हो सके, वह दिल्ली तथा अहमदाबाद की कई कंपनियों में मजदूरी का काम किया करता था, जिससे उसकी बहनों की शादी में आर्थिक रूप से मदद हो सके, लेकिन अंशुमान की मौत से पूरे घर में मातम पसरा हुआ है। परिवार के लोगों का कहना है कि सड़क पर गड्ढे न होते तो यह हादसा न होता। एक साथ उठी तीन अर्थियां बता दें कि एक साथ तीन दोस्तों का शव उठने से पूरे गांव में मातम है, गांव में चर्चा है कि तीन दोस्तों की जिंदगी एक साथ शुरू हुई और एक साथ ही तीनों की अर्थी उठी। उनकी दोस्ती की मिसाल गांव के सभी लोग दे रहे हैं, किसी ने नहीं सोचा था कि एक साथ रहने वाले तीनों दोस्तों की जान साथ में जाएगी।
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