लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज में आज, गुरुवार को भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने बतौर मुख्य अतिथि सेमिनार का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद में 3 बहनों ने सुसाइड किया। वे कोरियन सभ्यता से प्रभावित थीं। एक समय वह था, जब भारतीय समाज में राजा जनक अपनी बेटी सीता के लिए स्वयंवर करते थे। आज ये दिन आ गए हैं। आप खुद ही दोनों सभ्यताओं की तुलना कर लीजिए। पहले जब जर्मन विद्वान मैक्सम्युलर भारत आए तो भाषा ज्ञान न होने के कारण वेद को जान नहीं सके। जब वे लौटकर जर्मन गए तो वहां अनुवाद कर वेदों को ठीक तरह से जाना और कहा कि वास्तव में वेद ही हैं, जिसमें सब कुछ है। जरा सोचिए, भारत अगर आज दशमलव न दिया होता तो आखिर कैसे गणित चलता? आर्यभट्ट ने जब दशमलव दिया तभी ये गणित आगे बढ़ सका। भारत में कभी जाति परंपरा नहीं थी राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि UGC के नियम का बगैर नाम लेते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के डिसिशन में एक लाइन की टिप्पणी कि क्या हम फिर से जाति व्यवस्था की तरफ लौट रहे है? ये बेहद गंभीर बात है। मैं ये कहना चाहूंगा कि भारत में कभी जाति परंपरा नहीं थी। भारत में वर्ण परंपरा थी। जाति परंपरा सिर्फ वोट बैंक की पॉलिटिक्स की देन है। चीन जैसे देश दूसरे देशों में घुसकर कब्जा करते हैं नेशनल पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल देवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि NEP में IKS के उल्लेख से शिक्षा व्यवस्था में नई स्फूर्ति मिली है। एलोरा का कैलाश मंदिर को ऊपर से पहाड़ काटकर बनाया गया था। ये अपने आप मे दुर्लभ है। नेशनल पीजी कॉलेज लखनऊ यूनिवर्सिटी का ऑटोनोमस कॉलेज के रूप में अपना करिकुलम खुद डिजाइन कर रहा है। इसमें IKS को शामिल किया गया है। चित्रकूट में भगवान श्रीराम और भरत जी के बीच का संवाद हो या महाभारतकालीन युग में भीष्म पितामह और युधिष्ठिर के बीच का संवाद भारतीय टैक्स सिस्टम को दर्शाता है।
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