इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर 11 फरवरी को तलब किया है। कोर्ट ने सी जे एम गाजियाबाद को प्रत्येक पर पांच हजार रूपए लगाते हुए वारंट जारी करने तथा कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने कोर्ट नोटिस लेने से इंकार कर दिया जिसे कोर्ट ने डीम्ड नोटिस मान वारंट जारी करने का आदेश दिया। गाजियाबाद के लोनी श्रेत्र के सिद्दीकी नगर निवासी याची अनीस का आरोप है कि बिल्डर से मिली भगत कर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ओ एस डी, धर्मेंद्र प्रताप सिंह, प्रमोद कुमार सिंह सहायक इंजीनियर, महीपाल सिंह अमीन, गिरजा शंकर मल्ल, चौधरी रनवीर सिंह पुलिस इंस्पेक्टर ने उसकी जमीन पर जबरन सड़क का निर्माण कराया और विरोध करने पर मारा पीटा। जिस घटना की एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की अदालत में 2018 मे अर्जी भी दी थी। जो खारिज कर दी गई। इसके बाद जिला न्यायालय में पुनरीक्षण दाखिल किया, वह भी खारिज हो गया। तब इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों को नोटिस जारी किया लेकिन उन्होंने नोटिस लेने से मना कर दिया। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गाजियाबाद के माध्यम से जमानती वारंट जारी किया और 5000 रूपये हर्जाना लगाया ।आगामी 11 फरवरी को सुनवाई के समय उपस्थित होने का आदेश दिया है।
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