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अम्बेडकरनगर पंचायत चुनाव में मजबूत सपा का किला:चार विधायक व सांसद के दम पर भाजपा को मिलेगी कड़ी चुनौती

अम्बेडकरनगर में पंचायत चुनाव के पहले सपा मजबूत स्थिति में दिख रही है। ऐसा इसलिए है कि जिले की चार विधानसभा सीटों पर सपा के विधायक हैं और लोकसभा सीट से भी सपा का ही सांसद चुना गया है। ऐसे में आगामी पंचायत चुनाव केवल स्थानीय सरकार बनाने की कवायद नहीं, बल्कि सपा के राजनीतिक वर्चस्व की अगली कड़ी माना जा रहा हैं। सपा के चार विधायक और एक सांसद है। ऐसे में पंचायत चुनाव में भाजपा की राह और भी कठिन होती नजर आ रही है। गांव की स्थिति देखें तो सपा का कैडर पहले से सक्रिय है। पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर तक सपा समर्थकों की मजबूत मौजूदगी है। चारों विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित दौरे कर रहे हैं और विकास कार्यों के साथ-साथ संगठन को भी साधने में जुटे हैं। वहीं बीजेपी पर नजर डाले तो अभी वह जिलाध्यक्ष का चुनाव नहीं करा सकी। इसको लेकर कई बार असंतोष का माहौल भी दिखा। हालांकि भाजपा सत्ता में होने का लाभ गिनाकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं को प्रमुख हथियार बनाते हुए भाजपा घर-घर संपर्क अभियान चलाने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि पंचायत चुनावों में योजनाओं से ज्यादा स्थानीय चेहरे, जातीय समीकरण और व्यक्तिगत प्रभाव निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जहां भाजपा को अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है। सूत्र बताते है कि कई गांवों में सपा के पुराने और प्रभावशाली परिवारों का दबदबा कायम है। यही वजह है कि भाजपा को मजबूत प्रत्याशी तलाशने में पसीना बहाना पड़ रहा है। संगठन के भीतर संभावित बगावत और असंतोष भी भाजपा के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। कुल मिलाकर अम्बेडकरनगर का पंचायत चुनाव सपा के लिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का अवसर है, जबकि भाजपा के लिए यह साख बचाने की लड़ाई बनता जा रहा है। चार विधायक और सांसद के सहारे सपा पूरी ताकत झोंक चुकी है, ऐसे में भाजपा के लिए यह मुकाबला आसान नहीं, बल्कि बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है।


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