कहते हैं कि डेली लाइफ की छोटी-छोटी आदतें हमारी सेहत को बनाने या फिर बिगाड़ने का काम करती हैं। आपके उठने-बैठने, खाने-पीने और चलने-फिरने जैसी छोटी-छोटी चीजें सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। यहां तक कि आप टॉयलेट किस तरह से करती हैं, यह भी काफी मायने रखता है। महिलाएं अक्सर टॉयलेट जब जाती हैं, तो एक सबसे बड़ी गलती करती हैं, जिसका खामियाजा पेल्विक फ्लोर हेल्थ को भुगतना पड़ता है।
बाथरूम की कुछ सामान्य आदतें पेल्विक फ्लोर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। जिसके बारे में ज्यादातर महिलाओं को नहीं पता है। ज्यादातर महिलाएं जब टॉयलेट जाती हैं, तो फौरन बाथरूम की ओर भागती हैं और कुछ ही सेकेंड में काम निपटाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए एक्स्ट्रा जोर लगाते हैं, जिससे कि पेशाब जल्दी हो सके। ऐसा करने से आपको कई नुकसान हो सकते हैं।
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पावर पीइंग
पावर पीइंग के बारे में शायद आपने पहली बार सुना हो। यह पेल्विक फ्लोर की कमजोरी और यूरिनरी लीकेज में एक बड़ा भागीदार है। पावर पीइंग का मतलब है कि पेशाब करने के लिए जोर लगाना, अक्सर तेजी से पेशाब करना आदि। अगर आप टॉयलेट करने के दौरान यूरीन स्ट्रीम को पुश कर रहे हैं, जिससे कि वह तेजी से बाहर आ जाए। या फिर जितनी जल्दी हो सके काम पूरा करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। तो आप पावर पीइंग कर रहे हैं।
पावर पीइंग के नुकसान
लोग टॉयलेट को बहुत देर तक रोके रखने के नुकसानों के बारे में तो बात करते हैं। लेकिन इसके बारे में नहीं जानते हैं कि पेशाब करने के दौरान लगाया जाने वाला एक्स्ट्रा जोर आपके पेल्विक फ्लोर हेल्थ को कितना नुकसान पहुंचा सकता है। जबकि ऐसा कई लोग करते हैं। जैसे जब कैब घर के बाहर आकर खड़ी हो तो काम निबटाने के चक्कर में अधिक जोर लगाकर पेशाब करती होंगी। या फिर बच्चे के रोने पर फौरन जोर लगाकर टॉयलेट को खत्म करना चाहती होंगी। लेकिन ऐसा करना आपकी सेहत के लिए हानिकारक है। असल में मूत्राशय को खाली करने के लिए ज्यादा जोर लगाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि टॉयलेट पुश करने से एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है। जोकि समय के साथ पेल्विक फ्लोर की हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकता है।
छोड़ दें ये आदतें
एक्सपर्ट की मानें, तो अपने ब्लैडर को खाली करने के लिए एक्स्ट्रा जोर लगाने की जोर नहीं हैं। क्योंकि ब्लैडर वॉल पेशाब को बाहर धकेलने का काम करती है। लेकिन अगर आप पुश करते हैं, तो इससे एक्स्ट्रा दबाव के समय के साथ पेल्विक फ्लोर की मसल्स और लिगामेंट्स को स्ट्रेच कर सकता है। पेल्विर फ्लोर की कमजोरी, यूरिनरी लीकेज और यहां तक पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स की वजह बन सकता है। इससे बचने के लिए आपको पावर पीइंग की आदत को छोड़ना होगा।
पेशाब करने का सही तरीका
अब जब आपने यह जान लिया है कि आप एक आदत से सेहत को क्या-क्या नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए आपका यह जानना जरूरी है कि किस तरह से टॉयलेट करना सेफ है। जिससे कि आप इन नुकसानों से बचा जा सके। इसके लिए आपको दो बातों का ख्याल रखना चाहिए।
सही से बैठें और रिलैक्स करें
अपने पूरे शरीर का वेट सीट पर रखें और आराम से बैठ जाएं। क्योंकि टॉयलेट सीट पर झूलने से आपकी पेल्विक फ्लोर की मसल्स टाइट हो जाती है। जिससे ब्लैडर को पूरी तरह से खाली करना मुश्किल हो सकता है। वहीं कुछ गहरी सांसें लें और वजाइनल मसल्क को रिलैक्स करें। ऐसा करने से यूरिनरी स्फिंकटर को रिलैक्स होने में सहायता मिलती है और पेशाब का फ्लो आसानी से आ जाता है।
पुश नहीं करें
कभी भी टॉयलेट करने के दौरान एक्स्ट्रा पुश न करें। जोकि आप लास्ट की कुछ बूंदों को खाली करने के लिए करते होंगे। अगर लगे कि लास्ट में कुछ बूंदे बची हैं, तो अपने हिप्स को दाएं-बाएं हिलाएं। इसके अलावा खड़ी होकर दोबारा बैठने का प्रयास कर सकती हैं। जिससे कि बचा हुआ पेशाब बाहर आ जाए। हमेशा याद रखें कि पेशाब करते समय पुश या स्ट्रेन न डालें। पेल्विक फ्लोर की दिक्कतों से बचने के लिए टॉयलेट में अपना समय लें और पावर पीइंग करने से बचें।
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