नए साल के मौके पर बिहार के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) में इस बार रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक पहुंचे। आम दिनों में यहां हर महीने 8 से 10 हजार सैलानी आते हैं, वहीं न्यू ईयर के पहले दिन 70 हजार पर्यटक पहुंचे थे। इसमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। ठंड बढ़ने के साथ ही जंगल, नदी, तराई और पहाड़ियों का नजारा सैलानियों को खूब भा रहा है। पश्चिम चंपारण में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में नए साल को लेकर क्या तैयारी की गई? घूमने जाने वाले पर्यटकों के लिए क्या-क्या व्यवस्था थी? पहली बार जा रहे व्यक्ति कैसे पहुंचेंगे? पढ़िए इस रिपोर्ट में…! वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में ठंड के साथ ही पर्यटक भी बढ़े पश्चिम चंपारण जिले में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में ठंड बढ़ने के साथ ही सैर करने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है। नए साल पर भारी संख्या में सैलानी पहुंचते थे। यहां का जंगल, नदी की धारा और तराई का पहाड़ी इलाका पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। इस बार खास बात यह है कि VTR “लोकल पिकनिक” या “राज्य पर्यटन” की सीमा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय टूरिस्ट के अनुभव में भी जगह बना रहा है। इको-फ्रेंडली बांस के कॉटेज और जंगल के भीतर प्रकृति के करीब रहने वाला माहौल देसी पर्यटकों के साथ-साथ विदेशी मेहमानों को भी आकर्षित कर रहा है। रिजर्व प्रबंधन न्यू ईयर को इको-फ्रेंडली बनाने में सफल रहे। इसको लेकर एक्स्ट्रा गाइड, सिक्योरिटी और सफारी स्लॉट बढ़ाए गए। इको-टूरिज्म को किया गया प्रमोट- फॉरेस्ट ऑफिसर फॉरेस्ट ऑफिसर विकास राव ने कहा कि, ‘हम इको-टूरिज्म को प्रमोट कर रहे हैं। न्यू ईयर पर क्राउड मैनेज करने के लिए स्पेशल प्लान किया था। आसपास के होटल और लॉज में स्पेशल पैकेज की व्यवस्था की थी। बोनफायर, लोकल थारू डांस, फायरवर्क्स। वहीं रेस्टोरेंट ओनर मनोज यादव बताते हैं कि ‘मेन्यू में बिहारी लिट्टी-चोखा के साथ नेपाली मोमो और लोकल फिश करी ऐड की गई है। पिछले साल से डबल भीड़ जुटी थी। जंगल सफारी बना मुख्य आकर्षण, बोटिंग भी किया यहां का मुख्य आकर्षण जंगल सफारी है। जीप, साइकिल सफारी के जरिए घने जंगल घूम सकते हैं। गंडक नदी में बोटिंग, त्रिवेणी संगम का नजारा अदभुत है। रात में जानवरों की आवाज सुनकर पर्यटक रोमांचित हो रहे थे। वाल्मीकिनगर में गंडक नदी पर बोटिंग और कैनोपी वॉक का मजा लिया। हालांकि जंगल सफारी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। रॉयल बंगाल टाइगर की संख्या 15 सालों में 7 गुना बढ़ी वाल्मीकि रिजर्व वन्यजीवों की विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां रॉयल बंगाल टाइगर की संख्या पिछले 15 सालों में सात गुना बढ़ी है। इसके अलावा तेंदुआ, चीतल, सांभर, भालू, बंदर, गौर और कई दुर्लभ पक्षी मिलते हैं। हाल के दिनों में तेंदुए और गौर की मूवमेंट बढ़ी है। वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व में 60 प्रजातियों के स्तनधारी, 300 से अधिक प्रजातियों के पक्षी, 30 प्रकार के सरीसृप और 13 उभयचर प्रजातियां पाई जाती हैं। वनस्पतियों में 86 प्रकार के पेड़, 114 किस्म की घास और 56 प्रकार की जड़ी-बूटी और झाड़ियां शामिल हैं। स्टे ऑप्शन: अंदर फॉरेस्ट गेस्ट हाउस, बाहर होटल-लॉज की लाइन VTR में ठहरने के दो स्पष्ट विकल्प हैं। रिजर्व के अंदर: फॉरेस्ट विभाग के गेस्ट हाउस, जो टाइगर रिजर्व के भीतर हैं। रिजर्व के बाहर: कई होटल, लॉज और रिसॉर्ट, जहां पर्यटक सुविधानुसार रुकते हैं। अंदर के गेस्ट हाउस मतलब जंगल के “बीच” रहना। बाहर के होटल-लॉज है। स्थानीय होटल-लॉज संचालकों का कहना है कि पीक सीजन में भीड़ बढ़ते ही सबसे पहले कमरे फुल हो जाते हैं। इको-टूरिज्म का नया चेहरा: अमेरिका से आए पर्यटक स्टीफन फ्रांसिस ने बताया कि VTR में बांस से बनी चीजें अनोखी हैं और अनुभव इतना अच्छा रहा कि वे दोबारा आना चाहेंगे। उन्होंने जंगल सफारी को रोमांच भी बताया। जर्मनी से आई पर्यटक रेनाटे मार्गरेट ने VTR को प्रकृति और रोमांच का दुर्लभ संगम बताया, जबकि जर्मनी के ही फ्रैंक वर्नर हाइन्ज के अनुसार यह जगह केवल वन्यजीव क्षेत्र नहीं, बल्कि रोमांच, आध्यात्मिक शांति और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली का समग्र अनुभव देती है; उन्होंने बांस के बेड और कॉटेज को आरामदायक बताया। एक दशक में VTR में पर्यटकों की संख्या बढ़ी- सह निर्देशक वन संरक्षण सह निर्देशक नेशामनी के. ने बताया कि पिछले एक दशक में VTR में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है और इसके पीछे सुविधाओं का विस्तार, सड़क, ठहरने की व्यवस्था और प्राकृतिक सौंदर्य जैसे कारण हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में 5,135 अक्टूबर में 6,543 और नवंबर में 15,769 पर्यटकों ने जंगल का दौरा किया। जबकि 20 दिसंबर तक 12,938 पर्यटक ट्रेकिंग और जंगल सफारी का आनंद ले चुके हैं। रिजर्व का फैलाव: वाल्मीकि नगर से भिखना ठोरी तक, झील से नंदनगढ़ तक वाल्मीकि टाइगर रिजर्व एक बड़े इलाके में फैला है। पश्चिम चंपारण में वाल्मीकि नगर वन क्षेत्र, गोवर्धन वन क्षेत्र, मंगुरहा वन क्षेत्र, उदयपुर जंगल, भिखना ठोरी को VTR का हिस्सा बताया जाता है। वहीं अमवामन झिल और नंदनगढ़ जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचने की बात कही जा रही है। यही फैलाव VTR को “सिंगल-पॉइंट” डेस्टिनेशन नहीं रहने देता। यहां आने वाला टूरिस्ट अलग-अलग स्पॉट्स पर जाकर अलग तरह का अनुभव ले सकता है। कहीं जंगल घना है, कहीं पानी का दृश्य है, कहीं, बॉर्डर बेल्ट का अपना रोमांच है। न्यू ईयर के लिए खास तैयारी, बढ़ाए गए सफारी स्लॉट और सुरक्षा वन विभाग और रिजर्व प्रबंधन ने न्यू ईयर को देखते हुए विशेष तैयारियां की हैं। फॉरेस्ट ऑफिसर विकास राव ने बताया, “हम इको-टूरिज्म को प्रमोट कर रहे हैं। न्यू ईयर पर भीड़ को मैनेज करने के लिए स्पेशल प्लान तैयार किया गया है।” VTR में पर्यटन सुविधाओं के लिए शुल्क तय वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के लिए कई पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनके लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं। जंगल सफारी का शुल्क ₹400 प्रति व्यक्ति तय किया गया है, जबकि गंडक बोट सफारी के लिए ₹118 प्रति व्यक्ति लिया जाता है। इसके अलावा ईको पार्क में प्रवेश शुल्क ₹20 प्रति व्यक्ति और कालेश्वर झूला का शुल्क ₹12 प्रति व्यक्ति निर्धारित है। साइकिल सफारी और नेचर ट्रेल की भी सुविधा पर्यटन गतिविधियों की बात करें तो वाल्मीकि नगर क्षेत्र में जंगल सफारी, पार्क भ्रमण, बोटिंग, झूला, गोलघर और साइकिल सफारी की सुविधा उपलब्ध है। गोवर्धन क्षेत्र में केवल जंगल सफारी कराई जाती है, जबकि मंगुराहा क्षेत्र में जंगल सफारी के साथ साइकिल सफारी और नेचर ट्रेल का आनंद पर्यटक ले सकते हैं। इसके अलावा वाल्मीकि नगर क्षेत्र में कई प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन के लिए पहुंचते हैं। डबल बेड के 26 रूम और 40 बेड के डॉरमेट्री वाल्मीकि नगर स्थित ईको पर्यटन केंद्र में पर्यटकों के ठहरने के लिए डबल बेड के कुल 26 कमरे और 40 बेड की डॉरमेट्री उपलब्ध है। यहां अलग-अलग श्रेणी के कमरों की सुविधा दी गई है। इनमें एसी सुइट रूम– 4, बांस के कमरे, 6 ट्री हट, 1 टेंट हट, 3 एसी डीलक्स रूम, 6 एसी प्रीमियम रूम, 4 और कोतरहा ईको हट– 2 शामिल हैं। इनके किराये की बात करें तो डॉरमेट्री का शुल्क 105 रुपए प्रति व्यक्ति है। जबकि, कोतरहा ईको हट 840 रुपए, एसी प्रीमियम और एसी डीलक्स रूम 1406 रुपए, टेंट हट 735 रुपए, ट्री हट 1050 रुपए, बांस के कमरे के लिए 1050 रुपए और एसी सुइट रूम के लिए 1575 रुपए प्रति दिन रखा गया है। जंगल सफारी के लिए निर्धारित है तीन रूट जंगल सफारी के निर्धारित रूट वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी के लिए तीन निर्धारित रूट बनाए गए हैं। इन्हीं रूटों पर पर्यटकों को सफारी की अनुमति दी जाती है, इसके अलावा जंगल के अंदर अन्य क्षेत्रों में प्रवेश प्रतिबंधित है। सफारी के लिए 22 किलोमीटर, 14 किलोमीटर और 18 किलोमीटर लंबाई के रूट निर्धारित हैं। पर्यटक अपनी सुविधा और रुचि के अनुसार किसी भी रूट का चयन कर सकते हैं। वन विभाग के अनुसार, यही रूट सफारी जोन के रूप में चिह्नित हैं और इन्हीं जोनों के भीतर पर्यटक जंगल सफारी का आनंद लेते हैं। जंगल सफारी के लिए 13 गाड़ी है उपलब्ध वाल्मीकि नगर, गोवर्धन और मांगुराहा क्षेत्र में पर्यटकों के लिए फिलहाल छोटी-बड़ी कुल 13 सरकारी सफारी गाड़ियां उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त तीन निजी सफारी वाहन भी संचालन में हैं, जो विधिवत पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) के बाद ही चलाए जा रहे हैं। वन विभाग के अनुसार, नए साल को देखते हुए आठ और नई सफारी गाड़ियां महंगाई गई हैं, जिससे पर्यटकों को सफारी सुविधा और अधिक सुचारू रूप से मिल सकेगी। कैसे पहुंचे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व? वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व तक पहुंचने के लिए रेल, सड़क और हवाई तीनों माध्यम उपलब्ध हैं। रेल मार्ग से आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वाल्मीकि नगर रोड है, जो रिजर्व क्षेत्र के बिल्कुल पास स्थित है। इसके अलावा नरकटियागंज जंक्शन एक प्रमुख रेल जंक्शन है, जो वाल्मीकि नगर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। नरकटियागंज से टैक्सी, बस या निजी वाहन के जरिए आसानी से वाल्मीकि नगर पहुंचा जा सकता है। हवाई मार्ग से आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) है, जो करीब 160 किलोमीटर दूर है, जबकि पटना एयरपोर्ट लगभग 240 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दोनों एयरपोर्ट से टैक्सी या बस के जरिए वाल्मीकि नगर पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग से आने वाले पर्यटक बेतिया–बगहा होते हुए वाल्मीकि नगर पहुंच सकते हैं। बेतिया से वाल्मीकि नगर की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। अच्छी सड़क व्यवस्था होने के कारण निजी वाहन, टैक्सी और बस से यात्रा सुविधाजनक मानी जाती।
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