यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने आजमगढ़ जिले के बरदह थाना क्षेत्र में छापेमारी की है। यहां शिक्षा बोर्ड और यूनिवर्सिटी की मार्कशीट सर्टिफिकेट रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर सर्टिफिकेट के साथ दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 217 विभिन्न फर्जी शिक्षा बोर्ड यूनिवर्सिटी की मार्कशीट सर्टिफिकेट रजिस्ट्रेशन और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद किया गया है। उनके पास से 42 फर्जी मोहर और 10 मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। जिन्हें गिरफ्तार किया गया है उनकी पहचान आजमगढ़ के बरहद थाना के शशि प्रकाश राय उर्फ राजन शर्मा उर्फ शनि पुत्र हरिशंकर राय और ठेकमा गांव के मनीष कुमार राय पुत्र महेन्द्र राय के रूप में हुई है। फर्जी वेबसाइट बनाकर किया रिजल्ट अपलोड किया जाता था यूपी एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया की माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट www.upmsp.edu.in है। जबकि कतिपय अवांछित तत्वों / व्यक्तियों की ओर से फर्जी वेबसाइट www.upmsp-edu.in एवं www.upms ponline.in चलाई जा रही थी। इस बेवसाइट को अधिकारिक बेवसाइट से मिलता-जुलता बनाया गया था। इससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती थी। इस सम्बन्ध में सचिव, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से प्रयागराज के साइबर थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसी कड़ी में एसटीएफ के डीएसपी शुधान्शु शेखर की निगरानी में टीम गठित कर अभिसूचना संकलन किया जा रहा था। इसी कड़ी में STF की टीम आजमगढ़ पहुंची। यहां विश्वनीय सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई कि विभिन्न प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह का सरगना शशि प्रकाश राय है, जो अपने घर पर मौजूद है। इस सूचना पर एसटीएफ टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली से बीएससी पास, उसके बाद बनाया कॉल सेंटर गिरफ्तार अभियुक्त शशि प्रकाश राय ने पूछताछ पर बताया कि उसने दिल्ली से B.Sc किया है। इसका एक गिरोह है। जो विभिन्न प्रकार के फर्जी / कूटरचित दस्तावेज तैयार करता है। इसके पहले यह आगरा में भी काम कर चुका है। वर्ष 2022 में जनपद जौनपुर में एक काॅल सेंटर खोला, जिसमें सोशल मीडिया के माध्यम इस तरह के दस्तावेज बनाने आदि का पोस्ट डाला जाता था। लोग सम्पर्क करते थे, जिसके बाद शशि प्रकाश अपने ममेरे भाई मनीष राय को आवश्यकता अनुसार डिटेल बताता था। इसके बता डिटेल के अनुसार मनीष राय फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। फर्जी बेवसाइट पर कूटरचित मार्कशीट का रिजल्ट भी अपलोड कर दिया जाता था। जिससे लोग वेबसाइट पर रोल नंबर डालकर रिजल्ट ऑनलाइन चेक करते थे, जो वह दस्तावेज (शिक्षा बोर्ड / यूनिर्वसिटी) असली प्रतीत होता था। फर्जी मार्कशीट के आधार पर लोग विभिन्न संस्थानों में नौकरी पा जाते है तो उनका ऑनलाइन / ऑफलाइन वेरीफिकेशन भी कर देता था। फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने के लिए नाम पर होती थी 15 से 20 हजार की वसूली
फर्जी मार्कशीट व अन्य प्रपत्र आदि बनवाने के लिए 15 से 20 हजार रुपये लेता था। जिसे सभी लोग आपस में बांट लेते थे। लोगों को फर्जी दस्तावेज कोरियर के माध्यम से भेजते थे। अब तक लगभग 6-7 हजार से अधिक विभिन्न प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार किया जा चुका है। यूपी एसटीएफ आरोपियों के लिंकेज की भी तलाश कर रही है।

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