युवा ब्राह्मण समाज संगठन की बैठक रविवार को आयोजित हुई, जिसमें यूजीसी से जुड़े मुद्दों और आगामी परशुराम जयंती को लेकर व्यापक चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता स्थायी समिति के अध्यक्ष जितेंद्र गौतम ने की, जबकि संचालन संगठन अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने किया। बैठक में वक्ताओं ने यूजीसी से जुड़े विषय को संवेदनशील बताते हुए इस पर अपने विचार रखे। संगठन के मंत्री पुनीत शर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाजहित में काम करने वाले लोगों को समर्थन दिया जाए और इसके लिए प्रत्येक बैठक में शपथ दिलाने का प्रस्ताव रखा गया। अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य परशुराम जयंती और यूजीसी मुद्दे पर रणनीति तय करना है। उन्होंने कहा कि इस बार अक्षय तृतीया पर भगवान परशुराम जयंती का कार्यक्रम भव्य रूप से मनाया जाएगा। साथ ही, यूजीसी के विरोध को संगठन स्तर पर लगातार जारी रखा जाएगा और 23 मार्च को संभावित सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। बैठक में संगठन के सदस्य सौरव शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में ब्राह्मण समाज कई समस्याओं से जूझ रहा है और उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज आर्थिक रूप से भी कमजोर हो रहा है, इसलिए अब समय आ गया है कि एकजुट होकर लंबी लड़ाई लड़ी जाए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में समानता और समाज के लिए स्पष्ट नीति व रणनीति बनाने पर जोर दिया। वहीं, संस्थापक सदस्य जितेंद्र गौतम ने कहा कि यूजीसी प्रकरण को लेकर समाज में चिंता बनी हुई है। उन्होंने आशंका जताई कि मामले पर स्पष्ट निर्णय में देरी हो सकती है, ऐसे में सरकार इसे लागू कर सकती है। उन्होंने कहा कि योग्य लोगों के साथ अन्याय की भावना बढ़ रही है, इसलिए शिक्षा व्यवस्था को सभी के लिए समान और सुरक्षित बनाना जरूरी है, जहां किसी प्रकार का भेदभाव न हो। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन जनप्रतिनिधियों से संवाद करेगा और जरूरत पड़ने पर दिल्ली जाकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। स्थायी समिति सदस्य अजय शर्मा ने कहा कि परशुराम जयंती का आयोजन समाज की गरिमा के अनुरूप होना चाहिए, जिसके लिए सभी सदस्यों को अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। अध्यक्षता कर रहे जितेंद्र गौतम ने यूजीसी गाइडलाइंस पर नाराजगी जताते हुए इसे समाज को बांटने वाला बताया और सांसदों के घेराव की चेतावनी दी। बैठक में वक्ताओं ने शिक्षा में समानता, छात्रों की सुरक्षा और भेदभाव खत्म करने की जरूरत पर भी जोर दिया, साथ ही समाज में एकता और आपसी सम्मान बनाए रखने की अपील की। इस दौरान रमाकांत पचौरी समेत अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए यूजीसी के विरोध को धार देने और समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही। बैठक में राजीव नरहरि, डॉ. आरके पचौरी, डॉ. मनीष शर्मा, डॉ. प्रियंक शर्मा, ललित शर्मा, पं. गणेश दत्त शर्मा, पं. भूषण शर्मा, सुरेंद्र शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इसके अलावा सौरभ, अमित, आशीष, रविकांत, आनंद, दीपक सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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