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Third World War की आहट! Iran, America, Israel की जंग ने दुनिया को हिलाया, ईरान से लड़ते लड़ते NATO से भी भिड़ बैठे Trump

पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व इस वक्त आग के उस दरवाजे पर खड़ा है जहां से या तो पूरी दुनिया युद्ध की अंधी खाई में गिरेगी या फिर आखिरी पल में कोई चमत्कार इसे रोक लेगा। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा यह भीषण टकराव अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक मोर्चों पर एक साथ फट रहा विस्फोट बन चुका है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ चेतावनी दी है कि अब जंग केवल मिसाइलों से नहीं लड़ी जाएगी, बल्कि वैश्विक तकनीकी कंपनियों को भी निशाने पर लिया जाएगा। गूगल, एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट और टेस्ला जैसी दिग्गज कंपनियां अब इस टकराव के सीधे घेरे में आ चुकी हैं। यह संकेत है कि जंग अब साइबर और आर्थिक मोर्चे पर भी पूरी ताकत से फैलने वाली है।

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उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रवैया और भी खतरनाक संकेत दे रहा है। एक तरफ वह कह रहे हैं कि दो से तीन हफ्तों में युद्ध खत्म हो सकता है, दूसरी तरफ वह ईरान के तेल ठिकानों को पूरी तरह मिटा देने की धमकी भी दे रहे हैं। हार्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उनका बयान और ज्यादा चौंकाने वाला है। उन्होंने साफ कहा कि अगर यह रास्ता बंद रहता है तो अमेरिका को फर्क नहीं पड़ता। यह बयान पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है।
इस बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दावा है कि यह जंग आधे से ज्यादा जीत ली गई है। इजराइल ने ईरान के परमाणु और औद्योगिक ठिकानों पर लगातार हमले किए हैं। इस्फहान जैसे संवेदनशील इलाके में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि हर हमले के साथ युद्ध और भड़क रहा है, खत्म नहीं हो रहा।
इस जंग की सबसे भयावह तस्वीर इसके आंकड़े हैं। अब तक तीन हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। ईरान में करीब उन्नीस सौ और लेबनान में बारह सौ से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। अमेरिका के तेरह सैनिक भी इस आग में झुलस चुके हैं। हर दिन यह आंकड़ा और खौफनाक होता जा रहा है।
हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब समुद्री रास्ते भी सुरक्षित नहीं रहे। हार्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है। हालांकि ईरान ने बांग्लादेश के छह तेल जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की मंजूरी दी है, लेकिन यह राहत बहुत छोटी है। असल संकट अभी भी बरकरार है।
ब्रिटेन ने इस जंग से दूरी बनाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ कहा कि यह उनकी जंग नहीं है और देश को इसमें नहीं घसीटा जाएगा। हालांकि ब्रिटेन खाड़ी में समुद्री सुरक्षा के लिए पैंतीस देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। उनका लक्ष्य है कि किसी तरह तेल और जरूरी सामान की सप्लाई फिर से शुरू हो सके।
इस बीच, एक और बड़ा भूचाल तब आया जब ट्रंप ने नाटो से बाहर निकलने का संकेत दिया। उन्होंने इस सैन्य गठबंधन को कागजी शेर बताया। अगर अमेरिका सच में नाटो से अलग होता है तो यह वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह हिला देगा।
उधर, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं है। उसका कहना है कि भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है। दूसरी तरफ चीन और पाकिस्तान ने पांच सूत्रीय शांति योजना पेश की है। इसमें तुरंत युद्धविराम, बातचीत की शुरुआत और समुद्री रास्तों की सुरक्षा जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
देखा जाये तो जंग अब सिर्फ सीमाओं तक नहीं रही। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि इस संघर्ष के बीच मानवाधिकारों पर भी शिकंजा कसता जा रहा है। मीडिया की आजादी सीमित हो रही है और आम नागरिकों की जिंदगी और कठिन होती जा रही है।
उधर, खाड़ी के कई देशों में ड्रोन हमले, मिसाइल हमले और अपहरण जैसी घटनाएं तेजी से बढ रही हैं। कुवैत, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात तक इस आग की लपटें पहुंच चुकी हैं। यहां तक कि एक भारतीय नागरिक भी ड्रोन हमले में घायल हो गया।
बहरहाल, पूरी दुनिया इस वक्त सांस रोककर देख रही है। क्या यह युद्ध अगले दो हफ्तों में खत्म होगा या फिर यह ऐसा तूफान बनेगा जो पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगा। एक बात साफ है, यह सिर्फ तीन देशों की जंग नहीं रही, यह अब वैश्विक संकट बन चुकी है।
Source: Prabha Sakshi via DNI News (Prayagraj)

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