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Supreme Court के फैसले से बौखलाए Donald Trump, भारत समेत दुनिया पर ठोका 15% Global Tariff

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि सभी देशों पर एक दिन पहले लागू किए गए 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।
ट्रंप की ओर से पहले लगाए गए भारी भरकम शुल्क को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के बाद शुक्रवार को राष्ट्रपति ने भारत समेत सभी देशों पर 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए प्रभावी 10 प्रतिशत शुल्क लगाया था।
अमेरिका के 10 प्रतिशत शुल्क पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत सरकार ने शनिवार को कहा कि वह इन शुल्कों और उनके प्रभावों का अध्ययन कर रही है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “कल शुल्क को लेकर अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के हास्यास्पद, खराब ढंग से लिखे गए और असामान्य रूप से अमेरिका विरोधी फैसले की गहन, विस्तृत और पूरी समीक्षा व कई महीनों के विचार-विमर्श के बाद मैं अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर रहा हूं। इन देशों में से कई दशकों से अमेरिका से अनुचित लाभ उठा रहे थे, जिसका (जब तक मैं आया नहीं) कोई प्रतिशोध नहीं लिया गया।”

उन्होंने कहा, “आने वाले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन नए और कानूनी रूप से स्वीकार्य शुल्क निर्धारित करेगा और लागू करेगा, जो ‘अमेरिका को पुनः महान बनाने’ की हमारी सफल प्रक्रिया को जारी रखेंगे।”
नयी दिल्ली में वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि सरकार अमेरिका में शुल्क से जुड़े ताजा घटनाक्रम और उनके संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रही है।
मंत्रालय ने बयान में कहा, “शुक्रवार को सीमा शुल्क के बारे में आए अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संबोधित संवाददाता सम्मेलन की जानकारी हमारे संज्ञान में है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से कुछ कदमों की घोषणा की गई है। हम इन सभी घटनाक्रमों का उनके प्रभावों के संदर्भ में अध्ययन कर रहे हैं।”

अमेरिकी उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने शुक्रवार को छह-तीन के बहुमत से फैसला दिया कि ट्रंप का आपातकालीन शक्तियों के कानून (आईईईपीए, 1977) के तहत दूसरे देशों पर आयात शुल्क लगाने का कदम वैध नहीं था। इस कानून के तहत राष्ट्रपति के पास आयात पर कर लगाने का अधिकार नहीं था।
अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी ने दिसंबर तक आईईईपीए के तहत जारी शुल्क आदेशों के तहत कुल 133 अरब डॉलर वसूल किए हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस राशि का रिफंड आयातकों को मिल सकता है, लेकिन आम लोगों को यह रिफंड मिलना मुश्किल है, क्योंकि कंपनियों ने बढ़े हुए शुल्क का बोझ कीमत वृद्धि के रूप में उपभोक्ताओं पर डाल दिया था।


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