खगड़िया जिले के मध्य बोरने पंचायत निवासी एसएसबी जवान हरिओम कुमार का ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से निधन हो गया। वे असम-भूटान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 61वीं बटालियन के भैरव कुंडा पोस्ट पर तैनात थे। गुरुवार, 19 तारीख को उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। योगेन्द्र सिंह के बेटे हरिओम कुमार मई 2011 में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में शामिल हुए थे। वे देश की सीमाओं की सुरक्षा में पूरी निष्ठा से अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी उन्हें तेज हार्ट अटैक आया और रास्ते में ही उनका निधन हो गया। जवान का पार्थिव शरीर देखकर मां बेसुध घटना के बाद एसएसबी ने सभी विभागीय औपचारिकताएं पूरी कीं। शुक्रवार को जवान का पार्थिव शरीर सड़क मार्ग से उनके पैतृक गांव मध्य बोरने लाया गया। तिरंगे में लिपटा शव गांव पहुंचते ही परिजनों के चीत्कार से पूरा इलाका गमगीन हो गया। उनकी मां सुनीता देवी बेसुध हो गईं, जबकि पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव के अन्य लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। हरिओम कुमार का विवाह वर्ष 2013 में पसराहा गांव निवासी मनोज सिंह की पुत्री जुगनी भारती से हुआ था। उनके परिवार में 11 वर्षीय पुत्री रौनक और 6 वर्षीय पुत्र हर्ष राज हैं। जवान की असमय मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, जिससे छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। पत्नी ने सरकार से की अपील शोकाकुल पत्नी जुगनी भारती ने सरकार से भावुक अपील करते हुए कहा कि “मेरे पति देश की सेवा करते हुए चले गए। अब मेरे और मेरे बच्चों का क्या होगा? सरकार को मेरी नौकरी और मेरे बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। मेरे घर का चिराग बुझ गया है, अब परिवार को कौन संभालेगा? मुझे न्याय चाहिए।” उनकी इस अपील ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।
अंतिम संस्कार से पूर्व एसएसबी के जवानों द्वारा दिवंगत हरिओम कुमार को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। अनुशासित पंक्तियों में खड़े जवानों ने सलामी देकर अपने साथी को अंतिम विदाई दी। इस दौरान भारत माता की जय और शहीद जवान अमर रहें के नारों से वातावरण गूंज उठा, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। युवाओं को देशसेवा के लिए करते थे प्रेरित
चाचा नवलकिशोर ने बताया कि हरिओम कुमार बेहद मिलनसार, सरल स्वभाव और कर्तव्यनिष्ठ जवान थे। वे जब भी छुट्टी में गांव आते थे, सभी से प्रेमपूर्वक मिलते थे और युवाओं को देशसेवा के लिए प्रेरित करते थे। उनके निधन से गांव ने अपना एक होनहार सपूत खो दिया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए सरकार से पीड़ित परिवार को शीघ्र सहायता, अनुकंपा नियुक्ति और बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। सभी ने दिवंगत जवान की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार को इस कठिन घड़ी में धैर्य रखने की कामना की।
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