अमेरिका-ईरान युद्ध का असर भारत पर भी पड़ रहा है। लगातार एलपीजी किल्लत बनी हुई है। इसी क्रम में वाराणसी के फूलचंद्र विश्वकर्मा का ‘डीजल चूल्हा’ इस समय डिमांड में है। वाराणसी के लोहटिया इलाके में दुकान चलाने वाले फूलचंद्र विश्वकर्मा पिछले 50 सालों से डीजल से चलने वाला चूल्हा बना रहे हैं। उनका कहना है कि पहली बार ऐसा है कि इस चूल्हे की डिमांड इतनी बढ़ी है क्योंकि यह 25 हजार रुपए का है। महीने में एक या दो बिकने वाला चूल्हा अब महीने 20 से 25 बिक रहा है। फूलचंद्र विश्वकर्मा के डीजल चूल्हा में क्या खास है और कैसे इसकी शुरुआत हुई और एलपीजी की किल्लत के बाद किस तरह से कस्टमर इसे लेने के लिए आ रहे हैं। इन सब विषयों पर दैनिक भास्कर ने डीजल चूल्हा बनाने वाले फूलचंद्र विश्वकर्मा से बात की; पढ़िए रिपोर्ट… देखिये चूल्हे की मैन्यूफैक्चरिंग और काम करने की तस्वीरें… 60 साल पुरानी है दुकान
वाराणसी के लोहटिया में फूलचंद्र विश्वकर्मा के नाम से चूल्हा बनाने की दुकान है। यह दुकान 60 साल पुरानी है और यहां नमकीन बनाने वालों और हलवाइयों के लिए स्पेशल चूल्हे बनाए जाते हैं। दुकान के मालिक फूलचंद्र विश्वकर्मा ने बताया – वाराणसी में सबसे पहले हमने डीजल का चूल्हा बनाना शुरू किया। यह चूल्हा आज वाराणसी के एक दो जगहों पर और बनाया जा रहा है। यह चूल्हा आजकल काफी डिमांड में है। डीजल चूल्हा पूछते हुए आ रहे हैं लोग
फूलचंद्र विश्वकर्मा ने बताया – हमारी खुद की मैन्यूफैक्चरिंग है डीजल का चूल्हा; एलपीजी की किल्लत के बाद इसकी डिमांड बढ़ी है। पहले हम महीने में दो चूल्हा बेचते थे, लेकिन जब से एलपीजी की किल्लत हुई है । हमने एक महीने में 30 चूल्हे बेचे हैं। ये चूल्हा बहुत ही अच्छा है और इसमें आग लगने की भी दिक्कत या खतरा नहीं रहता। एक लीटर में एक घंटा चलता है चूल्हा
फूलचंद्र ने बताया – यह चूल्हा 40 लीटर की टंकी से जुड़ा हुआ है। इसमें 40 लीटर एक बार में डीजल डाला जाता है। जो पाइप के रास्ते बूंद-बूंद करके चूल्हे तक जाता है और चूल्हा जल उठता है। एक लीटर में एक घंटा यह चूल्हा जलता है। अमूमन नमकीन उद्योग और मिठाई के लिए इसे हलवाई ले जाते हैं। काशी के होटलों और पूड़ी कचौड़ी वालों के यहां डिमांड
फूलचंद्र ने बताया – इसकी डिमांड अब काशी के पूड़ी कचौड़ी और रेस्टुरेंट और होटलों में शुरू हो गई। होटल से लोग लगतार लेने और इन्क्वयरी करने आ रहे हैं। इसकी कीमत 25,500 रुपए है। कई बड़ी और नामी दुकानों ने भी हाल ही में इसे लिया है और इसका उपयोग कर रहे हैं। डीजल, जले हुई रिफाइन और मोबिल से भी चलेगा चूल्हा
फूलचंद्र विश्वकर्मा ने बताया – ये डीजल चूल्हा सिर्फ डीजल से नहीं बल्कि जले हुए रिफाइन, जले हुए मोबिल से भी आसानी से चलेगी बस एक घंटे में कुछ कम रहेगा जलने का टाइम। लेकिन डीजल के अलावा उससे भी जलाई जा सकती है।
आम दिनों से ज्यादा बढ़ा है काम
कारीगर अनिल विश्वकर्मा ने बताया – हम लोग डीजल की भट्टी (डीजल चूल्हा) बनाते हैं। काफी दिनों से बन रही थी। लेकिन गैस नहीं मिलने की वजह से इसकी डिमांड बढ़ गई है। रोजाना दो भट्टी बनती है। ऑर्डर ज्यादा है हम लोग बना नहीं पा रहे हैं। होटल व्यवसायी पहुंच रहे दुकान
रंजय जायसवाल का कैंटोमेंट और घाट पर होटल चलाते हैं। रंजय ने कहा गैस की किल्लत है उससे सभी लोग परेशान हैं। हमने ऑनलाइन चूल्हा देखा पर समझ में नहीं आया तो हमने पता किया तो फूलचंद्र जी का नाम पता चला। यहां आकर देखा गया तो चूल्हा काफी अच्छा है। इसे इस्तेमाल करना भी आसान है। लकड़ी पर बन रहा खाना, काम हुआ मेन्यू से आइटम
रंजय ने बताया – एलपीजी की किल्लत से काफी कुछ बदल गया है। लकड़ी पर खाना बनाना पड़ रहा है। इससे कुक भी परेशान हैं। इसके अलावा खाने में डिले हो रहा है। जिससे कस्टमर परेशान कर रहे हैं । ऐसे में हमें मेन्यूकॉर्ड में कटौती करनी पड़ी है। जो चीज देर में बनने वाली है। उसे हम लोगों ने बनाना बंद कर दिया है।

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