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Kharg Island में बिछेंगी अमेरिकी सैनिकों की लाशें? अपने खजाने को बचाने के लिए ईरान ने बना लिया प्लान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वह ईरान का तेल अपने कब्जे में लेना चाहते हैं। 29 मार्च को फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप बोले मुझे सबसे अच्छा यही लगता है कि हम ईरान का तेल ले लें। उन्होंने इसकी तुलना वेनेजुएला से की जहां राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठाने के बाद से वहां के तेल इंडस्ट्री को लंबे समय तक अपने कंट्रोल में रखने की योजना बनाई गई है। ईरान का ज्यादातर तेल एक ही जगह से बाहर आता है खार्ग आइलैंड से। ट्रंप ने कहा कि सच कहा जाए तो मेरा फेवरेट काम है ईरान से तेल लेना। अमेरका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट में कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान में अपनी सैन्य कार्रवाई खत्म करने के लिए एक नए और पहले से अधिक समझदार शासन से गंभीर बातचीत कर रहा है। बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है और उम्मीद है कि जल्द समझौता हो जाएगा। लेकिन अगर जल्दी समझौता नहीं हुआ, और अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य तुरंत व्यापार के लिए खुला नहीं किया गया, तो अमेरिका ईरान में अपने इस रुकने को खत्म करते हुए वहां के बिजली बनाने वाले प्लांट, तेल के कुएं और खार्ग द्वीप (और संभव है समुद्र के पानी को पीने योग्य बनाने वाले प्लांट भी) को पूरी तरह नष्ट कर देगा। अभी तक इन जगहों को जानबूझकर नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई उसके उन सैनिकों और अन्य लोगों की मौत के जवाब में होगी, जिन्हें ईरान के पुराने शासन के 47 साल के आतंक के दौरान मारा गया।

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तेल की कीमतें एक महीने में 50% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। ब्रैंड क्रूड $16 प्रति बैरल के पार चला गया है। यानी आने वाले दिनों में इसका असर हर देश हर आदमी के जेब पर पड़ना तय दिख रहा है। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी मौजूदगी तेजी से बढ़ाई है। पेंटागन ने करीब 10,000 ऐसे सैनिक भेजने के आदेश दिए हैं जिन्हें जमीन पर कब्जा करने और उसे संभाल कर रखने की ट्रेनिंग दी गई है। करीब 3500 सैनिक पहले ही पहुंच चुके हैं। जिनमें 2200 मरीन शामिल हैं। और भी सैनिक रास्ते में हैं। ऐसी खबर आ रही है। 82वां एयरबन डिवीजन के सैनिकों को भी तैयार रखा गया है। लेकिन अगर इस तेल के बड़े एक्सपोर्ट हब पर हमला किया जाता है तो यह काफी जोखिम भरा हो सकता है। इससे अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का खतरा भी बढ़ सकता है और जंग लंबी होने के साथ-साथ महंगी भी हो सकती है।  ट्रंप ने कहा कि हो सकता है हम खार्ग आइलैंड पर कब्जा करें और हो सकता है ना करें। हमारे पास कई ऑप्शंस हैं और अगर ऐसा करते हैं तो हमें वहां कुछ समय तक रहना पड़ेगा। 

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पेंटगन कहता है कि उसे आदेश मिलते ही वह 18 घंटे के अंदर-अंदर अपने पैराट्रूपर्स को दुनिया के किसी भी कोने में पहुंचा सकता है। और यह बात यहां ईरान भी नोट कर रहा है। ईरान इसलिए नोट कर रहा है क्योंकि अगर अमेरिका अपने तीन युद्धपोत में 4000 नौसैनिक और उनके साथ 2000 पैराट्रूपर्स मिडिल ईस्ट में भेज रहा है तो इसकी पूरी पूरी संभावना है कि अमेरिका ईरान में कुछ बड़ा करने वाला है। उसका कारण यह है कि पैराट्रूपर्स मरीन सोल्जर्स दोनों ही पैराट्रूपर्स हो, मरीन सोल्जर्स हों, उनका एक खास ऑपरेशन होता है। जब किसी समुद्र से लगे इलाके या द्वीप पर मरीन सोल्जर्स को युद्धपोत के साथ पहुंचना होता है, तो वहां सबसे पहले किसे उतारा जाता है? 
खार्ग आइलैंड की तुलना में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मूज पर हमला करना ज्यादा खतरनाक है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मूज के रास्ते में ना सिर्फ नेवल माइंस बिछी हो सकती हैं बल्कि ईरान के समुद्री तट पर उसकी नौसेना का भारी जमावड़ा भी हो सकता है। ऐसे में अगर अमेरिका के 2000 पैराट्रूपर्स स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में ईरान की समुद्री सीमा पर उतरते हैं तो उन्हें ज्यादा जोखिम रहेगा। लेकिन अगर यही पैराट्रूपर्स खार्ग आइलैंड पर उतरते हैं तो इससे अमेरिका को सफलता मिलने की संभावना ज्यादा होगी और अभी सबको ऐसा लग रहा है। 
Source: Prabha Sakshi via DNI News (Prayagraj)

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