Monday, April 6, 2026
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KGMU में मजारों पर 4 अप्रैल की डेडलाइन खत्म:पांच मजारों को हटाने के लिए लगाई गई थी नोटिस


                 KGMU में मजारों पर 4 अप्रैल की डेडलाइन खत्म:पांच मजारों को हटाने के लिए लगाई गई थी नोटिस

KGMU में मजारों पर 4 अप्रैल की डेडलाइन खत्म:पांच मजारों को हटाने के लिए लगाई गई थी नोटिस

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी परिसर में बनी मजारों को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दी गई अंतिम समय-सीमा 4 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है। ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन नियमों के तहत कार्रवाई करता है या किसी अन्य समाधान की दिशा में आगे बढ़ता है।

22 जनवरी से शुरू हुई थी कार्रवाई की प्रक्रिया
मामले की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को हुई थी, जब KGMU प्रशासन ने परिसर में स्थित मजारों की वैधता को लेकर पहला नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में संबंधित कमेटियों से मजारों के निर्माण की तिथि, वैधता और आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। इसके लिए 7 फरवरी तक का समय निर्धारित किया गया था।
हालांकि निर्धारित समय-सीमा के भीतर केवल एक मजार कमेटी ने ही जवाब दिया, जबकि बाकी कमेटियों की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

दूसरी बार नोटिस, बढ़ाई गई थी समय-सीमा
प्रशासन ने संतोषजनक जवाब न मिलने पर 26 फरवरी को दोबारा नोटिस जारी किया। इस बार रमजान और होली को देखते हुए संबंधित पक्षों को अतिरिक्त समय देते हुए 4 अप्रैल तक की मोहलत दी गई।
साथ ही कमेटियों को कुलसचिव के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद अधिकांश कमेटियों की ओर से अपेक्षित जवाब नहीं मिल पाया।

एक मजार ने ऐतिहासिक होने का किया दावा
न्यू ऑर्थोपेडिक परिसर में स्थित एक मजार की कमेटी ने प्रशासन को लिखित जवाब देते हुए दावा किया कि यह मजार वर्ष 1947 से पहले की है और ऐतिहासिक महत्व रखती है।
प्रशासन ने इस दावे को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। दस्तावेजों और उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही इस मजार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

पांच मजार कमेटियों की चुप्पी बनी वजह सख्ती की
वहीं परिसर में मौजूद अन्य पांच मजारों की कमेटियों ने अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही माना है और साफ किया है कि सार्वजनिक संस्थान की भूमि पर स्थित किसी भी ढांचे के लिए वैध दस्तावेज आवश्यक हैं।
प्रशासन का कहना है कि बार-बार अवसर देने के बावजूद सहयोग न करना नियमों का उल्लंघन है और ऐसी स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

रमजान के कारण टली थी कार्रवाई, अब हो सकती है शुरुआत
मजारों को हटाने की कार्रवाई पहले रमजान के मद्देनजर टाल दी गई थी, ताकि किसी प्रकार की संवेदनशील स्थिति उत्पन्न न हो। लेकिन अब रमजान समाप्त होने और तय समय-सीमा खत्म होने के बाद प्रशासन के पास कार्रवाई शुरू करने का रास्ता खुल गया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने संबंधित पक्षों को अंतिम 15 दिन का अतिरिक्त अवसर भी दिया था, जो अब समाप्त हो चुका है।

कानूनी विवाद के चलते बढ़ सकती है हलचल
इस पूरे मामले को लेकर पहले से ही विवाद की स्थिति बनी हुई है। जहां एक ओर KGMU प्रशासन नियमों और वैधता के आधार पर कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कानूनी विकल्प अपनाए हैं।
ऐसे में यदि प्रशासन द्वारा सीधे हटाने की कार्रवाई की जाती है तो आने वाले दिनों में कानूनी और सामाजिक स्तर पर हलचल बढ़ सकती है।

अब प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
4 अप्रैल की समय-सीमा समाप्त होने के बाद अब पूरा मामला KGMU प्रशासन के अगले कदम पर निर्भर है। यह तय करेगा कि परिसर में स्थित मजारों को हटाने की कार्रवाई कब और किस रूप में की जाएगी।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है, जो इस पूरे विवाद की दिशा और परिणाम तय करेगा।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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