आईआईटी कानपुर में टेककृति-26 का आयोजन चल रहा है। महोत्सव के दूसरे दिन ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला छात्रों के बीच पहुंचे। अंतरिक्ष से लौटने के करीब आठ महीने बाद उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। शुभांशु शुक्ला ने कहा- 41 साल बाद भारत का अंतरिक्ष में पहुंचना बड़ी उपलब्धि है। यह सिर्फ एक मिशन नहीं, बल्कि देश की भावनाओं का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में जाना और वापस आना अलग ही अनुभव है। इस अनुभव को शब्दों में बताना आसान नहीं है। जोखिम भरे मिशन में परिवार की भूमिका सबसे अहम ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने मिशन की चुनौतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा- अंतरिक्ष मिशन बेहद जटिल और जोखिम भरे होते हैं। ऐसे समय में केवल आपको ही नहीं, बल्कि आपके परिवार को भी मानसिक रूप से तैयार रहना पड़ता है। शुक्ला ने बताया कि फैसले लेने के दौर से लेकर ट्रेनिंग और फिर अंतरिक्ष की यात्रा तक, उनके परिवार का अटूट सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि अगर परिवार का साथ न हो तो ऐसे चुनौतीपूर्ण मिशन पूरे करना नामुमकिन हो जाता है। पूरे देश से मिला अभूतपूर्व प्यार शुभांशु ने देशवासियों से मिले समर्थन को ‘अभूतपूर्व’ बताया। उन्होंने कहा कि, जिस तरह से पूरे देश के लोग इस मिशन के लिए एकजुट हुए, उसने उन्हें एक बड़े परिवार जैसा अहसास कराया। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि जब आप देश के लिए कुछ बड़ा करते हैं, तो पूरा देश आपकी ताकत बन जाता है। अंतरिक्ष मिशनों को लेकर लोगों के बीच जो उत्साह है, वह भारत के उज्ज्वल भविष्य को दर्शाता है। टेककृति में रक्षा और तकनीक पर मंथन कार्यक्रम के दूसरे दिन रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक की भूमिका पर भी चर्चा हुई। मेजर जनरल सी.एस. मान (एडीजी, आर्मी डिजाइन ब्यूरो) ने सेना में हो रहे नए प्रयोगों के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही ‘मेडटेक’ पैनल में विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं में आ रही आधुनिक तकनीक और भविष्य की चुनौतियों पर अपनी बात रखी। एआई समिट के दौरान विशेषज्ञों ने आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव और इसकी संभावनाओं को लेकर छात्रों की जिज्ञासाओं को शांत किया।

Leave a Reply