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BOB घोटाले में सीनियर मैनेजर समेत 5 दोषी:लखनऊ CBI कोर्ट ने 3-3 साल की सजा सुनाई, फर्जी दस्तावेजों पर लोन पास कर बैंक को 41.50 लाख का नुकसान पहुंचाया

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने बैंक फ्रॉड के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन सीनियर मैनेजर समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने सभी को तीन-तीन साल की सजा और कुल 3.4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

सीनियर मैनेजर समेत पांच आरोपी दोषी करार
CBI कोर्ट, सेंट्रल लखनऊ ने 31 मार्च 2026 को इस मामले में फैसला सुनाया। दोषियों में बैंक ऑफ इंडिया, लाल बंगला शाखा कानपुर के तत्कालीन सीनियर मैनेजर नरेश चंदर भारद्वाज के अलावा साधना दीक्षित, राम जी शुक्ला, जितेंद्र श्रीवास्तव और प्रेम प्रकाश शामिल हैं। अदालत ने सभी आरोपियों को आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

2006 में फर्जी दस्तावेजों पर पास किए गए लोन
CBI जांच के मुताबिक, यह पूरा मामला 17 जुलाई 2006 से 26 अक्टूबर 2006 के बीच का है। उस समय सीनियर मैनेजर नरेश चंदर भारद्वाज ने विक्रम दीक्षित और अन्य लोगों के साथ मिलकर साजिश रची।
आरोप है कि उन्होंने फर्जी और काल्पनिक दस्तावेजों के आधार पर तीन लोन हाउसिंग लोन, ओडी मॉर्गेज लोन और ऑटो फाइनेंस लोन स्वीकृत किए। ये लोन ऐसे लोगों के नाम पर पास किए गए, जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थे।

बैंक को 41.50 लाख का नुकसान, आरोपियों को फायदा
इस धोखाधड़ी के चलते बैंक ऑफ इंडिया को करीब 41.50 लाख रुपये का नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों ने इस रकम का गलत तरीके से फायदा उठाया।
CBI ने अपनी जांच में पाया कि पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की गई थी, जिसमें दस्तावेजों को फर्जी तरीके से तैयार कर लोन स्वीकृत कराया गया।

2008 में दर्ज हुआ केस, 2010 में दाखिल हुई चार्जशीट
इस मामले में CBI ने 11 जनवरी 2008 को बैंक ऑफ इंडिया के जोनल मैनेजर, कानपुर की शिकायत पर केस दर्ज किया था।
जांच पूरी होने के बाद 26 अप्रैल 2010 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसके बाद मामला अदालत में विचाराधीन रहा।

लंबी सुनवाई के बाद आया फैसला
करीब 16 साल पुराने इस मामले में लंबी सुनवाई के बाद आखिरकार CBI की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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