एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने फेज-2 थाना क्षेत्र में चल रहे अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का पर्दाफाश किया। एटीएस टीम के प्रभारी ने इस मामले में फेज-2 थाने में केस दर्ज कराया है। पुलिस ने सर्वर और इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल कर अवैध गतिविधियां चलाने वाले आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। एटीएस टीम के उपनिरीक्षक राजेश यादव की ओर से दी गई शिकायत में बताया गया है कि एनएसईजेड क्षेत्र स्थित एक कंपनी डाटा सेंटर और क्लाउड सर्विस उपलब्ध कराती है। इसी कंपनी के माध्यम से सर्वर और इंटरनेट कनेक्शन लेकर अवैध टेलीफोन एक्सचेंज संचालित किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि 14 नवंबर 2025 को कंपनी के सेल्स कर्मचारी विजेंद्र कुमार चंचल को एक्सलो टेक्नोलॉजी ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी की ओर से सर्वर और कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए ई-मेल भेजा गया था। 50 हजार पर किराए पर लिया सर्वर
नजीबुल्हा नाम के व्यक्ति से 21 और 22 नवंबर को बातचीत हुई और उसने सर्वर के लिए परचेज ऑर्डर भेजा। ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 18 फरवरी 2026 को 50 हजार रुपये का भुगतान किया गया। भुगतान मिलने के बाद कंपनी की आईटी टीम ने संबंधित सर्वर को एक्टिव कर दिया और उसे क्लाइंट को सौंप दिया। यहीं से इस पूरे नेटवर्क की शुरुआत हुई। शुरुआत में चालू करवाए 16 कनेक्शन
जांच में पता चला कि 23 फरवरी को नजीबुल्हा ने जियो डिजिटल के जरिए 500 चैनल वाला स्टेटिक आईपी कनेक्शन लिया। इसके बाद सर्वर के साथ कई तकनीकी सेटअप किए गए। शुरुआत में 16 कनेक्शन चालू किए गए थे। आईटी टीम ने सर्वर पर रिमोट एक्सेस, डाटा इन-आउट और इंटरनेट सुविधा के साथ जियो कनेक्शन की तीन केबल भी जोड़ दी थीं। पूरा सर्वर नजीबुल्हा दूर बैठकर यानी रिमोटली ऑपरेट कर रहा था। लॉग डिस्टेंस गेटव को किया गया बायपास
इस अवैध एक्सचेंज के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉल को घरेलू कॉल में बदला जा रहा था यानी विदेश से आने वाली कॉल को इंटरनेट के जरिए भारत में लोकल कॉल की तरह दिखाया जा रहा था। ऐसा करने से इंटरनेशनल लॉन्ग डिस्टेंस (आईएलडी) गेटवे को पूरी तरह बायपास किया जा रहा था। इस मामले में नजीबुल्हा और कई अज्ञात के खिलाफ तीन धाराओं में केस दर्ज हुआ है। अभी तक मुख्य आरोपी नजीबुल्हा और अन्य की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

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