इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फर्जी भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड और फर्जी वीजा रखने के आरोपी एक चीनी नागरिक की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
झुआ फेई द्वारा दायर जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा कि यह अदालत चीन के साथ भारत के संबंध को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
अदालत ने कहा, “इस बात की संभावना है कि यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह अवैध रूप से देश छोड़कर भाग सकता है क्योंकि तानसोंग दोरजी नाम का एक अन्य सह आरोपी पहले ही देश छोड़कर जा चुका है और अब भी लापता है। चीन के साथ भारत की कोई प्रत्यर्पण संधि भी नहीं है।”
अदालत ने कहा, “यह स्पष्ट है कि केस डायरी में तथ्यों से पता चलता है कि याचिकाकर्ता फर्जी पासपोर्ट और आधार कार्ड के आधार पर भारत में ठहरा था और अवैध ढंग से मोबाइल चिप एवं प्रोसेसर्स निकालकर उसे चीन भेजने के कार्य में संलिप्त था। वह परोक्ष रूप से आर्थिक अपराध में शामिल था और भारत के आर्थिक हितों को खतरा पैदा कर रहा था।”
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, युयान हेयांग और लू लोंग नाम के दो चीनी नागरिक नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश करते समय भारतीय पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए थे और उनसे मिली सूचना के आधार पर मौजूदा याचिकाकर्ता को गिरफ्तार किया गया और उसके कब्जे से लाकपा शेरपा के नाम पर एक फर्जी पासपोर्ट और आधार कार्ड बरामद किया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि याचिकाकर्ता ने अपने वीजा में फर्जीवाड़ा कर उसकी वैधता 2020 से बढ़ाकर 2022 कर ली थी, जबकि उसका वीजा 2020 में ही समाप्त हो गया था। यह भी पाया गया कि इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने किराए पर फ्लैट ले रखा था।
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