सुप्रीम कोर्ट ने अगस्तावेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में आरोपी वकील गौतम खैतान द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के एक प्रावधान की वैधता को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने धनी आरोपियों द्वारा मुकदमे के बीच में ही कानूनों की वैधता पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति की कड़ी आलोचना की, जबकि उन्हें अभियोजन का सामना करना पड़ता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की अध्यक्षता वाली पीठ ने पीएमएलए की धारा 44(1)(सी) को खैतान की चुनौती को खारिज कर दिया, जिसमें यह आवश्यक है कि एक आधार अपराध और संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग अपराध की सुनवाई एक नामित विशेष न्यायालय द्वारा एक साथ की जाए।
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खेतान ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की एक धारा को चुनौती दी थी। कोर्ट ने इसे ट्रायल से बचने की कोशिश बताया और याचिका खारिज कर दी। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि यह नया चलन बन गया है कि अमीर आरोपी ट्रायल का सामना करने के बजाय कानून की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने लगते हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोग सोचते हैं कि वे सिस्टम को बायपास कर सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। उन्हें आम नागरिक की तरह ट्रायल का सामना करना चाहिए।
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वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि यह याचिका किसी विशेषाधिकार के लिए नहीं, बल्कि पहले से लंबित विजय मदनलाल चौधरी केस की समीक्षा याचिकाओं से जुड़ी है। लेकिन कोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया। सीजेआई ने कहा, ‘यह एक अनोखे प्रकार का मुकदमा है। क्योंकि मैं अमीर हूं, इसलिए मुझे विशेष सुनवाई चाहिए, यह रवैया गलत है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। इसे बदलना होगा।’
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