आगरा में निजी और कॉन्वेंट स्कूलों द्वारा महंगी किताबें और कॉपियां बेचने का मामला लगातार सामने आ रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि हर साल सिलेबस बदलकर उन्हें नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। शहर के कई स्कूलों में कक्षा 4 और 5 की किताबों का बिल 9 हजार रुपए से ज्यादा तक पहुंच रहा है, जबकि एनसीईआरटी का पूरा सेट कक्षा 4 का करीब 400 रुपए और कक्षा 5 का लगभग 450 रुपए में उपलब्ध है।
अभिभावकों का कहना है कि होली पब्लिक स्कूल, सेंट फ्रांसिस स्कूल समेत कई स्कूल किताबों को लेकर मनमानी कर रहे हैं।सेंट फ्रांसिस स्कूल में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगाकर करीब 5 हजार रुपए का सेट बेचा जा रहा है।
वहीं सेंट कॉनराड्स इंटर कॉलेज में कक्षा 3 के लिए 8078 रुपए का सेट दिया गया, जिसमें 6918 रुपए की किताबें और 1160 रुपए की कॉपियां शामिल हैं। सेंट मैरीज़ इंटर कॉलेज में भी कॉपियां बाजार कीमत से ज्यादा दर पर बेची जा रही हैं। अभिभावकों के अनुसार 50 रुपए की कॉपी भी 15 रुपए तक ज्यादा कीमत पर मिल रही है और स्कूल के नाम छपी कॉपियां लेने के लिए दबाव बनाया जाता है।
अभिभावक दीपांशु दीक्षित का कहना है कि हर साल सिलेबस बदलने से परिवार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है और किताबें केवल तय दुकानों पर ही मिलती हैं। वहीं पापा संस्था के अध्यक्ष दीपक सिंह सरीन ने बताया कि शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बावजूद किताबों की बिक्री पर रोक नहीं लगी है और अभिभावकों को कोई राहत या रिफंड नहीं मिला है।
नियमों के अनुसार स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई होनी चाहिए, लेकिन निजी स्कूलों की मनमानी के कारण महंगी किताबों और कॉपियों का यह खेल लगातार जारी है, जिससे अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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