झांसी में खेलते हुए 7 साल के बच्चे की आंख में कांटा घुस गया। कांटा आंख के अंदर पुतली में आर-पार हो गया। ऐसे में बच्चा दर्द से तड़पने लगा। परिजन उसे सीएचसी से मेडिकल कॉलेज लेकर आए। यहां डॉक्टरों ने तुरंत बच्चे का इलाज शुरू किया। OT बंद हो चुकी थी। मगर बच्चे की स्थिति गंभीर होने पर तुरंत ओटी खुलवाई गई। फिर 10 डॉक्टरों की टीम ने बच्चे को बेहोश कर ऑपरेशन किया। लगभग डेढ़ घंटे चले ऑपरेशन के बाद बच्चे की सफल सर्जरी की गई। डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी भी देर हो जाती तो बच्चे की आंख खराब हो सकती थी। पूरा मामला झांसी के टोड़ी फतेहपुर थाना क्षेत्र के सिजवा गांव का है। पहले दो तस्वीर देखिए अब पूरा मामला विस्तार से पढ़िए खजूर की टहनी से खेल रहा था सिजवा गांव के दशई कुशवाहा ने बताया- मेरा 7 साल का पोता देव उर्फ भूरे बाड़े में खेल रहा था। वहां खजूर की टहनी (घोटा) से खेलते हुए कांटा आंख में लग गया। कांटा आंख के अंदर पुतली में घुसा था। रोने की आवाज सुनकर हम लोग तुरंत मौके पर पहुंचे तो पोता तड़प रहा था। तुरंत उसे टोड़ी फतेहपुर ले गए। वहां मना कर दिया तो मऊरानीपुर सीएचसी ले गए। वहां से झांसी मेडिकल कॉलेज लेकर आए। यहां पर डॉक्टरों को दिखाया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर दिया है। अभी पोता वार्ड में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है। OPD में दिखाना आया था बच्चा मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया- शनिवार को ओपीडी बंद होने से थाेड़ी देर पहले लगभग 1:30 बजे परिजन एक बच्चे को लेकर आए। जिसकी आंख में कांटा घुसा हुआ था। तुरंत उसे भर्ती करके इलाज शुरू किया गया। साफ सफाई होकर ओटी बंद हो चुकी थी। मगर बच्चे की स्थिति गंभीर होने पर ओटी खुलवाई गई। साथ ही नेत्र विभाग और एनेस्थीसिया विभाग के 10 डॉक्टरों की टीम बनाई गई। जांचें होने के बाद बच्चे को बेहोश करके ओटी में ले जाया गया। लगभग डेढ़ घंटे तक सर्जरी चली और अब बच्चा ठीक है। सर्जरी नेत्र विभाग की डॉ. यशस्वी गोयंका डाॅ. सुरभि गुप्ता, डाॅ. अमित कुमार सिंह, जूनियर डॉक्टर प्रियंका, डॉ. सदानंद, डॉ. सिल्की, डॉ. दुर्गेश, अंजलि गुप्ता और एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. शम्सी और डाॅ. जसप्रीत ने की। देरी होती तो आंख पूरी खराब हो जाती प्रो. जितेंद्र कुमार ने आगे बताया कि अगर परिजन बच्चे को लाने में देरी कर देते तो आंख पूरी तरह से खराब हो जाती। फिर कुछ भी नहीं कर पाते। ऑपरेशन के बाद बच्चे की आंख काफी हद तक ठीक हो चुकी है। अब दवाइयों के जरिए उसको रिकवर कर रहे हैं। कांटा घुसने से बच्चे की आंख की काली पुतली और कोर्निया डैमेज हो गई है। साथ ही उसे मोतियाबिंद भी हो गया है। मगर आख बच गई है। मेरा आग्रह है कि खेलते समय बच्चों का ध्यान रखें। माता-पिता का इकलौता बेटा है 7 साल का देव उर्फ भूरे अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। उससे छोटी 5 साल की एक बहन निहारिका है। अभी देव यूकेजी पास करके कक्षा एक में आया था। उसके पिता पवन कुशवाहा खेती किसानी करते हैं। बेटे की हालत देखकर मां मानकुंवर का रो रोकर बुरा हाल है।

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