DniNews.Live

6 महीने बाद भी दुर्गा मंदिर निर्माण शुरू नहीं:सांसद धरने पर बैठे थे, कमिश्नर के आश्वासन से खत्म हुआ था धरना, अब तक वादा अधूरा

सिद्धार्थनगर में दुर्गा मंदिर ध्वस्तीकरण के बाद उसके पुनर्निर्माण का कार्य छह महीने बाद भी शुरू नहीं हो सका है। नवरात्र 2025 में हुए इस विवाद के बाद प्रशासनिक आश्वासन पर धरना समाप्त हुआ था, लेकिन अब तक वादा पूरा नहीं हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों में फिर से असंतोष बढ़ रहा है। यह घटना 23 सितंबर 2025 की देर रात की है। साड़ी तिराहा से विकास भवन तक चल रहे सड़क सुंदरीकरण कार्य के दौरान प्रशासन ने जेसीबी से विकास भवन की दीवार से सटे लगभग 40 साल पुराने दुर्गा मंदिर को ढहा दिया था। आरोप है कि यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना के की गई थी और मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों को पास के जमुआर नाले में प्रवाहित कर दिया गया था। अगली सुबह जब श्रद्धालु पूजा के लिए मंदिर पहुंचे और उसे टूटा हुआ देखा, तो उनमें भारी आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे विकास भवन परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब क्षेत्रीय सांसद जगदंबिका पाल अपने समर्थकों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगा, लेकिन संतोषजनक उत्तर न मिलने पर दोपहर करीब 3 बजे धरने पर बैठ गए। सांसद ने कहा कि नवरात्र में मंदिर तोड़ना हिंदू आस्था पर सीधा प्रहार है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। यह धरना लगभग छह घंटे तक चला। बढ़ते जनदबाव को देखते हुए बस्ती मंडल के कमिश्नर अखिलेश सिंह को स्वयं मौके पर आना पड़ा। उन्होंने सांसद जगदंबिका पाल, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों से बातचीत की और आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कमिश्नर के इस आश्वासन के बाद सांसद ने अपना धरना समाप्त कर दिया था। घटना के कुछ दिन बाद 29 सितंबर को हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा मंदिर स्थल पर विधिवत भूमि पूजन भी किया गया। उस समय यह संदेश दिया गया कि जल्द ही मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू किया जाएगा और आस्था को फिर से स्थापित किया जाएगा। आज की स्थिति यह है कि 6 महीने बीत जाने के बाद भी मंदिर का निर्माण नहीं हो सका और न ही निर्माण कार्य शुरू हो सका है। मंदिर स्थल आज भी खाली पड़ा है। जहां कभी पूजा-अर्चना होती थी, वहां अब सन्नाटा है। श्रद्धालु आज भी उसी स्थान पर पहुंचते हैं, दीप जलाते हैं और मंदिर बनने का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक मंदिर नहीं था, बल्कि पीढ़ियों की आस्था का केंद्र था। ऐसे में मंदिर का अब तक न बन पाना लोगों के लिए गहरी भावनात्मक पीड़ा का कारण बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल अब यही खड़ा हो रहा है कि जब कमिश्नर स्तर पर आश्वासन दिया गया था और उसी भरोसे पर धरना समाप्त हुआ था, तो फिर मंदिर निर्माण में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या यह मामला सिर्फ तत्कालीन जनआक्रोश को शांत करने तक सीमित था, या वास्तव में प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगा। फिलहाल, सिद्धार्थनगर का यह दुर्गा मंदिर प्रकरण एक ऐसी पूरी श्रृंखला बन चुका है—रात में मंदिर तोड़ा गया, सुबह जनआक्रोश फूटा, सांसद का धरना हुआ, कमिश्नर पहुंचे, आश्वासन मिला, भूमि पूजन हुआ—लेकिन 6 महीने बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका। यही वजह है कि अब यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि अधूरे वादे और इंतजार करती आस्था की पूरी कहानी बन चुका है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *