इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर के खानपुर थानाक्षेत्र में 36 वर्ष पुरानी हत्या के एक मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने बाबूलाल (मृत), हरिलाल, श्यामबली उर्फ दुख्खी एवं शिवाधार उर्फ अमरनाथ की अपील पर उनके अधिवक्ता और सरकारी वकील को सुनकर अपील स्वीकार करते हुए दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान आपस में विरोधाभासी कोर्ट ने कहा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान आपस में विरोधाभासी हैं और उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता। इसके अलावा महत्वपूर्ण गवाहों के शपथपत्रों का अभियोजन द्वारा खंडन न किया जाना जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। चोटों की साफ तस्वीर नहीं कोर्ट ने यह भी पाया कि घटना के दौरान आरोपियों को लगी चोटों का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण अभियोजन नहीं दे सका, जिससे पूरी कहानी संदिग्ध हो जाती है। साथ ही अन्य आरोपियों के खिलाफ साझा आपराधिक मंशा साबित करने के लिए भी कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने अपीलार्थियों को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। गाजीपुर के खानपुर थानाक्षेत्र स्थित संदल गांव में वर्ष 1986 में हुई संग्राम की हत्या के आरोप में ट्रायल कोर्ट ने बाबूलाल (मृत), हरिलाल, श्यामबली उर्फ दुख्खी एवं शिवाधार उर्फ अमरनाथ को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी।

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