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​3 महीने तक चला जिंदगी का संघर्ष,अब मुस्कुरा रही है’वेदा’:जूही में लावारिस मिली बच्ची को SNCU स्टाफ ने दी नई जिंदगी; अब जाएगी पालना गृह


                 ​3 महीने तक चला जिंदगी का संघर्ष,अब मुस्कुरा रही है'वेदा':जूही में लावारिस मिली बच्ची को SNCU स्टाफ ने दी नई जिंदगी; अब जाएगी पालना गृह

​3 महीने तक चला जिंदगी का संघर्ष,अब मुस्कुरा रही है’वेदा’:जूही में लावारिस मिली बच्ची को SNCU स्टाफ ने दी नई जिंदगी; अब जाएगी पालना गृह

पुलिस की गोद में जब एक मासूम पहली बार जिला महिला अस्पताल पहुंची थी, तो उसकी सांसें उखड़ रही थीं। शरीर संक्रमण से जूझ रहा था और वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी। लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की ममता ने हार नहीं मानी। करीब 90 दिनों की कड़ी मेहनत और इलाज के बाद आज वह नन्ही जान न केवल पूरी तरह स्वस्थ है, बल्कि उसकी मुस्कुराहट अस्पताल स्टाफ की सफलता की कहानी कह रही है। अस्पताल स्टाफ ने बड़े लाड़ से उसे नाम दिया है ‘वेदा’। कड़ाके की ठंड में लावारिस मिली थी मासूम वाकया 9 जनवरी 2026 की शाम का है। जूही थाना क्षेत्र में एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। शाम करीब 7:20 बजे महिला कांस्टेबल वंदना राजपूत उसे लेकर जिला महिला चिकित्सालय पहुँचीं। कड़ाके की ठंड और असुरक्षित माहौल के कारण बच्ची की हालत बेहद नाजुक थी। ड्यूटी पर तैनात बाल रोग विशेषज्ञों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे तुरंत एसएनसीयू (SNCU) में भर्ती किया और प्राथमिक जाँच के साथ ही जरूरी चिकित्सकीय देखभाल शुरू की गई। संक्रमण को हराकर पाया 4 किलो वजन जिला महिला अस्पताल की प्रबंधक डॉ. दरख्शां परवीन ने बताया कि,जब वेदा अस्पताल लाई गई थी, तो उसकी कंडीशन काफी खराब थी और उसे गंभीर इंफेक्शन हो गया था। डॉक्टरों ने तुरंत उसे वार्मर में रखा और एंटीबायोटिक दवाइयां देनी शुरू कीं। डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों की सतत निगरानी में उसका लगातार उपचार चलता रहा। तीन महीने की कड़ी देखभाल का ही परिणाम है कि आज बच्ची का वजन बढ़कर 4 किलोग्राम हो गया है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार उसका पूरा टीकाकरण भी समय पर किया गया है। स्टाफ ने निभाया ‘माँ’ का फर्ज, अब मिली विदाई
अस्पताल में रहने के दौरान पूरी यूनिट इस बच्ची से भावनात्मक रूप से जुड़ गई थी। यही वजह रही कि स्टाफ ने ही उसका नाम ‘वेदा’ रखा। आज 9 अप्रैल को यह बच्ची करीब 3 महीने की हो गई है और अब पूरी तरह स्वस्थ है। आज वेदा को सुरक्षित अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। उसे आगे की देखभाल के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारियों के संरक्षण में सुपुर्द किया गया है। कोर्ट में पेशी के बाद अब उसे बालिका पालना गृह भेजा जाएगा, जहाँ से कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे गोद लिया जा सकेगा।
टीम की जीत,सामूहिक प्रयास लाया रंग
SNCU की टीम ने इस सफलता को एक साझा जीत बताया है। इस विदाई के मौके पर प्रमुख अधीक्षिका डॉ. रुचि जैन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. मंजू सचान, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद यादव और नोडल अधिकारी डॉ. शिव कुमार मौजूद रहे। साथ ही डॉ. कात्यायनी, डॉ. श्रिया तिवारी और डॉ. दरख्शां परवीन ने भी वेदा को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ विदा किया। अस्पताल प्रबंधन का कहना है,कि वे भविष्य में भी इसी तरह पूरी निष्ठा के साथ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रयास करते रहेंगे।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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