औरंगाबाद में आगामी 13 दिसंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लाल बिहारी पासवान ने की। प्राधिकार प्रकोष्ठ में आयोजित इस बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संदीप सिंह तथा न्यायिक दंडाधिकारी राजीव कुमार भी उपस्थित रहे। बैठक में सीजेएम ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों के निस्तारण के लिए थानाध्यक्ष महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में सुलह योग्य मामलों को चिह्नित करें तथा पक्षकारों को लोक अदालत के प्रति जागरूक करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि थाने के स्तर से किए गए प्रयास न केवल लोक अदालत की सफलता सुनिश्चित करेंगे, बल्कि समाज में सौहार्द और विवाद-मुक्त वातावरण निर्माण में भी सहायक होंगे। थाना अध्यक्ष ने आपसी सहमति से पुराने विवाद सुलझाने की अपील की बैठक में एसीजेएम संदीप सिंह ने कहा कि प्राधिकार द्वारा विभिन्न न्यायालयों में लंबित सुलहनीय वादों की सूची थानावार भेजी गई है। ऐसे मामलों में पक्षकारों से समय पर संपर्क स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। थानाध्यक्ष अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य व्यक्तियों के माध्यम से भी लोगों को प्रोत्साहित करें कि वे अपने पुराने विवादों को आपसी सहमति से समाप्त कर समाज में भाईचारा बढ़ाने में सहयोग दें। सचिव तान्या पटेल ने निर्देश दिया कि यदि किसी वाद में काउंसलिंग की जरूरत पड़े तो थानाध्यक्ष पक्षकारों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार या संबंधित न्यायालय में भेजें। साथ ही, लोक अदालत संबंधी नोटिस पक्षकारों तक निश्चित रूप से पहुंचना चाहिए। नोटिस की तामिला करते समय पक्षकार का पूरा नाम एवं संपर्क नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है, ताकि प्राधिकार अपने स्तर से भी उनसे संपर्क कर सके। सचिव ने यह भी कहा कि यदि किसी मामले का सूचक थाना क्षेत्र से बाहर रहता है तो संबंधित थानाध्यक्ष, स्थानीय थाने से समन्वय स्थापित कर उसे नोटिस की सूचना पहुंचाएं और इसकी जानकारी प्राधिकार को भी भेजें। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को बुलाकर लोक अदालत की महत्ता से अवगत कराएं, ताकि वे अपने गांव-टोले में लोगों को जागरूक कर विवाद-मुक्त समाज निर्माण में योगदान दे सकें।बैठक के अंत में अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य मामलों का शीघ्र, सरल और सुलभ समाधान है, और इसके लिए पुलिस-प्रशासन व न्याय व्यवस्था का समन्वय अनिवार्य है।
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