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’10 हजार से शुरू किया मिट्टी के गहनों का सफर’:कानपुर की श्रुति के टेराकोटा आर्ट की विदेशों में डिमांड; जर्मनी और दुबई से भी ऑर्डर

अक्सर लोग समझते हैं कि बिजनेस शुरू करने के लिए लाखों की पूंजी और बड़े संसाधनों की जरूरत होती है, लेकिन कानपुर की रहने वाली महिला उद्यमी श्रुति मिश्रा ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। महज 10 हजार रुपए की मामूली रकम से ‘टेराकोटा ज्वेलरी’ यानी मिट्टी के गहने बनाने का काम शुरू करने वाली श्रुति आज न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि उनके बनाए ऑर्गेनिक गहनों की चमक सात समंदर पार जर्मनी, कनाडा और दुबई तक पहुँच गई है। कपड़ों का बिजनेस छोड़ पकड़ी मिट्टी की राह: श्रुति पहले कपड़ों के बिजनेस से जुड़ी थीं और उन्होंने ‘श्री दीप्तम क्रिएशन’ नाम से अपना एक ऑनलाइन ब्रांड भी शुरू किया था। इसी दौरान एक बार उनका कोलकाता जाना हुआ, जहाँ उनकी नजर मिट्टी से बनी बेहद खूबसूरत और कलात्मक ज्वेलरी पर पड़ी। बस यहीं से उनके मन में इस पारंपरिक कला को एक नए और मॉडर्न रूप में पेश करने का विचार आया। श्रुति ने न सिर्फ इस हुनर को बारीकी से सीखा, बल्कि इसे अपना जुनून और प्रोफेशन बनाने की ठान ली। पूरी तरह ईको-फ्रेंडली और वॉशेबल है यह कला: श्रुति के इन प्रोडक्ट्स की सबसे बड़ी खासियत इनका पूरी तरह से प्राकृतिक होना है। ये गहने शुद्ध क्ले यानी मिट्टी से तैयार किए जाते हैं और इनमें इस्तेमाल होने वाला धागा भी शुद्ध कॉटन का होता है, जो इसे त्वचा के लिए सुरक्षित बनाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या मिट्टी के गहने पानी से खराब हो जाएंगे? इसका जवाब देते हुए श्रुति बताती हैं,कि वे इनमें हाई-क्वालिटी एक्रेलिक कलर्स का इस्तेमाल करती हैं, जो पानी से कभी नहीं धुलते। वे हंसते हुए कहती हैं कि अगर गलती से गहनों पर पानी पड़ जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इनका रंग पूरी तरह पक्का और वॉशेबल है। 60 रुपए की ईयररिंग्स से लेकर हैवी नेकलेस तक:
बाजार में मिलने वाली भारी और महंगी आर्टिफिशियल ज्वेलरी के मुकाबले श्रुति के ये ‘लाइट वेट’ गहने बेहद सस्ते और टिकाऊ हैं। इनके कलेक्शन में खूबसूरत झुमके और ईयररिंग्स मात्र 60 से 70 रुपए की शुरुआती रेंज में उपलब्ध हैं। वहीं,गले के पूरे सेट की कीमत महज 125 रुपए से शुरू हो जाती है। श्रुति ने भगवान गणेश की आकृति वाला एक विशेष नेकलेस भी तैयार किया है, जिसकी कीमत 525 रुपए है। इसकी फिनिशिंग और डिजाइनिंग इतनी शानदार है कि पहली नजर में पहचानना मुश्किल है कि यह मिट्टी से बना है। उद्यमिता मेले ने दी उड़ान, अब विदेशी ग्राहकों की बारी:
श्रुति ने इस काम की शुरुआत अकेले ही की थी, लेकिन जैसे-जैसे मांग बढ़ी, उन्होंने अपने साथ तीन-चार और लोगों को जोड़ लिया। हाल ही में कानपुर के ‘उद्यमिता मेले’ में शामिल होने के बाद उनके हौसलों को नई उड़ान मिली है। यहाँ मिले एक्सपोजर की बदौलत उन्हें न सिर्फ स्थानीय स्तर पर ढेरों ऑर्डर मिले, बल्कि जर्मनी, दुबई, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों से भी बड़ी बिजनेस इंक्वायरी और ऑफर्स आ रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी जमाई धाक:
आज के दौर की जरूरतों को समझते हुए श्रुति ने अपने ब्रांड ‘श्री दीप्तम क्रिएशन’ को इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी मजबूती से खड़ा किया है। कोई भी ग्राहक घर बैठे इन ऑनलाइन पेजों के जरिए अपना पसंदीदा गहना ऑर्डर कर सकता है। महज एक साल के छोटे से सफर में श्रुति मिश्रा ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ नया करने की चाह हो और हाथों में हुनर, तो मिट्टी को भी बेशकीमती गहनों में बदला जा सकता है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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