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हैप्पी न्यू ईयर… राजगीर में आपका स्वागत है:ग्लास ब्रिज से नालंदा के खंडहर तक का रोडमैप, जानें हर पर्यटन स्थल और पहुंचने का सही रास्ता

नव वर्ष 2026 का जश्न मनाने के लिए अगर आप बिहार के सबसे हॉट टूरिस्ट डेस्टिनेशन राजगीर और नालंदा आने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी है। इतिहास, अध्यात्म और आधुनिक एडवेंचर का यह संगम स्थल पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। हालांकि, 1 जनवरी को भीड़ के कारण सफारी पार्क बंद रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पर्यटकों से अपनी यात्रा 31 दिसंबर या 2 जनवरी को प्लान करने की अपील की है। यहां हम आपको राजगीर और नालंदा के उन सभी प्रमुख स्थलों की जानकारी दे रहे हैं, जहां आपको जरूर जाना चाहिए, साथ ही यह भी कि वहां आसानी से कैसे पहुंचा जाए। 1. राजगीर: यहां प्रकृति और रोमांच का मिलन होता है। राजगीर अब सिर्फ धार्मिक नगरी नहीं रही, बल्कि यह एक मॉडर्न एडवेंचर हब बन चुका है। यहां घूमने के लिए एक दिन भी कम पड़ सकता है। नेचर सफारी और ग्लास ब्रिज: ये राजगीर का सबसे बड़ा आकर्षण है। पांच पहाड़ियों के बीच गहरी खाई पर बना ग्लास ब्रिज (कांच का पुल) पर्यटकों को रोमांचित करता है। इसके अलावा यहां सस्पेंशन ब्रिज, जिप लाइन (हवा में लटककर जाना), स्काई वॉक और तीरंदाजी का मजा लिया जा सकता है। (नोट: यह सोमवार को बंद रहता है और टिकट ऑनलाइन बुक करना अनिवार्य है, ऑफ लाइन टिकट की संख्या 300 के ही करीब होती है।) जू सफारी (Zoo Safari): यहां जानवर पिंजरे में नहीं, बल्कि खुले जंगल में रहते हैं और पर्यटक बंद बसों में बैठकर उन्हें देखते हैं। यहाँ बाघ (Tiger), शेर (Lion), तेंदुआ, भालू और हिरण को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का मौका मिलता है। यह भी सोमवार को बंद रहता है। घोड़ा कटोरा झील: ये एक ‘इको-टूरिज्म’ स्पॉट है। यहाँ पेट्रोल-डीजल गाड़ियां प्रतिबंधित हैं। झील के बीच में भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा मन मोह लेती है। यहां बोटिंग (नौका विहार) की सुविधा है। यहां पहुंचने के लिए आपको मुख्य सड़क से टमटम (घोड़ा गाड़ी) या ई-रिक्शा लेना पड़ता है। विश्व शांति स्तूप और रोपवे (Ropeway): रत्नागिरी पर्वत पर स्थित यह सफेद संगमरमर का स्तूप शांति का प्रतीक है। यहां जाने के लिए रोपवे (रज्जू मार्ग) का इस्तेमाल होता है। अब यहां पुराने सिंगल चेयरलिफ्ट के साथ-साथ केबिन वाले नए रोपवे भी लग गए हैं, जो परिवार के साथ जाने के लिए सुरक्षित हैं। ऊपर से राजगीर की वादियों का नजारा अद्भुत दिखता है। गर्म जल कुंड (ब्रह्मकुंड): सर्दियों में यहाँ नहाने का अलग ही महत्व है। राजगीर में 22 कुंड हैं, लेकिन ब्रह्मकुंड का पानी सबसे गर्म (करीब 45 डिग्री) रहता है। मान्यता है कि इसमें गंधक होने के कारण चर्म रोग ठीक होते हैं। पांडु पोखर: बच्चों के साथ जा रहे हैं तो यह बेस्ट जगह है। यह एक मनोरंजन पार्क है जहां बोटिंग, भूल-भुलैया, और कई तरह के झूले और गेम जोन मौजूद हैं। सोन भंडार और जरासंध का अखाड़ा: इतिहास प्रेमियों के लिए सोन भंडार एक रहस्य है। कहा जाता है कि यहाँ मौर्य शासक बिंबिसार का खजाना छुपा है, जिसे आज तक कोई खोज नहीं पाया। पास ही जरासंध का अखाड़ा है, जहाँ महाभारत काल की यादें जुड़ी हैं। वेणु वन और जापानी मंदिर: वेणु वन वह जगह है जहां भगवान बुद्ध ने लंबा समय बिताया था। यह एक बेहद शांत पार्क है। इसके अलावा पास ही स्थित जापानी मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। 2. नालंदा: ज्ञान की प्राचीन धरोहर राजगीर से मात्र 12-15 किलोमीटर की दूरी पर नालंदा है, जो दुनिया के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक का गवाह है। प्राचीन नालंदा महाविहार (खंडहर): यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल लाल ईंटों से बने ये खंडहर उस गौरवशाली अतीत की कहानी कहते हैं जब यहां दुनिया भर से 10,000 छात्र पढ़ने आते थे। यहां का मुख्य स्तूप (सारिपुत्र स्तूप) और मठों की कतारें देखने लायक हैं। नालंदा पुरातत्व संग्रहालय (Museum): खंडहरों के ठीक सामने स्थित इस म्यूजियम में खुदाई के दौरान मिली मूर्तियां, सिक्के और जले हुए चावल के दाने रखे हैं, जो उस समय के आक्रमण की गवाही देते हैं। ह्वेनसांग मेमोरियल: चीनी यात्री ह्वेनसांग की याद में बना यह हॉल इंडो-चाइनीज वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। यहां एक विशाल घंटा और ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत देखने को मिलते हैं। पावापुरी जल मंदिर (नजदीक ही स्थित): नालंदा से कुछ ही दूरी पर पावापुरी है, जो जैन धर्म का पवित्र तीर्थ है। यहाँ तालाब के बीचों-बीच संगमरमर का बना जल मंदिर है, जहाँ भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया था। 3. स्थानीय जायका: सिलाव का खाजा यात्रा के दौरान नालंदा और राजगीर के बीच पड़ने वाले सिलाव कस्बे में रुकना न भूलें। यहाँ का ‘खाजा’ (52 परतों वाली मिठाई) विश्व प्रसिद्ध है और इसे GI टैग मिला हुआ है। यह इतना खस्ता होता है कि मुंह में रखते ही घुल जाता है। कैसे पहुंचें राजगीर और नालंदा? (How to Reach) नव वर्ष पर भीड़ को देखते हुए अपनी यात्रा की प्लानिंग पहले से कर लें। यहाँ पहुंचने के लिए यातायात के सभी साधन उपलब्ध हैं: ट्रेन से (By Train): राजगीर स्टेशन: राजगीर सीधे दिल्ली (श्रमजीवी एक्सप्रेस), वाराणसी (बुद्ध पूर्णिमा) और पटना से जुड़ा है। पटना से राजगीर के लिए कई इंटरसिटी और पैसेंजर ट्रेनें सुबह शाम चलती हैं। नालंदा स्टेशन: राजगीर जाने वाली ट्रेनें नालंदा स्टेशन पर भी रुकती हैं। बिहारशरीफ जंक्शन: यह बड़ा जंक्शन है, जहाँ कई लंबी दूरी की ट्रेनें रुकती हैं। यहाँ से राजगीर बस या ऑटो से 30-40 मिनट में पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग (By Road): बस सेवा: पटना के गांधी मैदान और मीठापुर बस स्टैंड से हर 15-20 मिनट पर राजगीर के लिए एसी और नॉन-एसी बसें मिलती हैं। किराया 100 से 200 रुपए के बीच है। निजी वाहन: पटना से बख्तियारपुर-बिहारशरीफ होते हुए राजगीर की सड़क (NH-20 और SH-71) चकाचक है। पटना से पहुंचने में मात्र 2.5 से 3 घंटे लगते हैं। हवाई मार्ग (By Air): सबसे नजदीकी एयरपोर्ट गया (Gaya) है, जो करीब 70 किमी दूर है। पटना एयरपोर्ट (लगभग 100 किमी) देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा है। वहां से आप प्री-पेड टैक्सी या बस ले सकते हैं। लोकल ट्रांसपोर्ट (घूमने के लिए): राजगीर और नालंदा के अंदर घूमने के लिए ई-रिक्शा (टोटो) सबसे सुलभ साधन है। आप पूरे दिन के लिए टोटो रिजर्व भी कर सकते हैं (किराया 800-1200 रुपये के बीच) या शेयरिंग में भी जा सकते हैं। या आप घोड़ा गाड़ी टमटम का भी लुफ्त उठा सकते हैं। महत्वपूर्ण सलाह: सफारी की टिकटें केवल rajgirsafari.bihar.gov.in से बुक करें। दलालों के चक्कर में न पड़ें और अपनी आईडी प्रूफ साथ रखें।


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