अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज अब ‘स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी महाराज’ के नाम से जाने जाएंगे। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े का जगद्गुरु बनाए जाने के बाद शनिवार को वे पहली बार संगम नगरी प्रयागराज पहुंचे। यहां उन्होंने त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई और अपने गुरु व अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि का आशीर्वाद लिया। हरिद्वार में मिली जगद्गुरु की पदवी, बदला नाम
मौज गिरी आश्रम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरि गिरि ने बताया कि स्वामी चक्रपाणि की सनातन धर्म के प्रति अटूट निष्ठा को देखते हुए ही उन्हें बीते दिनों हरिद्वार में ‘जगद्गुरु’ की पदवी से विभूषित किया गया। दीक्षा के बाद अब उनका नाम बदलकर स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी महाराज हो गया है।
महंत हरि गिरि ने विश्वास जताया कि वे सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि स्वामी चक्रपाणि जिस भी मठ की जिम्मेदारी संभालना चाहेंगे, जूना अखाड़ा उन्हें वह दायित्व सौंपने के लिए तैयार है। मुगलों से लड़ने वाला अखाड़ा अब राष्ट्र रक्षा करेगा
जगद्गुरु की पदवी संभालने के बाद स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी ने अखाड़े के गौरवशाली इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा कि जूना अखाड़े का इतिहास रहा है कि सनातन को बचाने के लिए नागा संन्यासियों ने मुगलों तक से युद्ध लड़ा है। अखाड़ा हमेशा से राष्ट्र रक्षा, धर्म रक्षा और विशेषकर गौ रक्षा के लिए तत्पर रहा है। संगम, भगवान वेणी माधव और सप्त ऋषियों का आशीर्वाद लेकर अब वे धर्म और राष्ट्र के कार्यों को और तेजी से आगे बढ़ाएंगे। प्रयागराज के नगर देवता के किए दर्शन
अपनी यात्रा के दौरान स्वामी चक्रपाणि ने सबसे पहले गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में पूजन किया। इसके बाद उन्होंने प्रयागराज के नगर देवता भगवान वेणी माधव और सप्त ऋषियों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

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