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हिजाब विद्रोह को कुचला, Gen-Z से कैसे निपटेंगे खामनेई, क्या ईरान में हो जाएगा खलीफा का तख्तापलट

ईरान में सरकार के खिलाफ आवाम विद्रोह पर है। 40 साल पहले जिस तरह इस्लामी कट्टरपंथियों ने देश की चुनी हुई सरकार का तख्ता फट किया। उसी तरह आज की आवाम ईरान से मजहबी कट्टरपंथ वाली सत्ता को उखाड़ [संगीत] के फेंकने पर आमादा है। पिछले चार दिनों से लगातार यह आंदोलन बढ़ता जा रहा है और अब मुल्क का जनजी इस आंदोलन का हिस्सा बन चुका है। बिगड़ी व्यवस्था से नाराज हुई आवाम। सड़कों पर घमासान, मुस्लिम मुल्क परेशान। टहरान की सड़कों पर युवा प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा है। चौराहे, बाजार, मॉल सब जगह प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। कई जगहों पर व्यापारी दुकानें बंद कर प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। पूरे ईरान में यह प्रदर्शन फैल चुका है। तराज, हमेदान, केश, मलाड, इसहान, किरमन शाह, सिराज और यजद जैसे शहरों में जेंज़ सड़कों पर उतर आए हैं।

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ईरान की जेन जेड का कहना है कि वह अब इस्लामिक शासन से तंग आ चुके हैं। प्रदर्शन के दौरान इस्लामिक क्रांति को खत्म करने और देश को इस्लाम से आजाद करने की मांग जोरदार तरीके से उठाई जा रही है। यह प्रदर्शन पिछले चार दिनों से चल रहा है। जनता में आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर खामने के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया गया। बढ़ती महंगाई को लेकर ईरान एक बार फिर उबाल पर है। दक्षिणी फार्स प्रांत में उग्र प्रदर्शन करते हुए लोगों ने इमारत में जबरन घुसने की कोशिश की और जब कामयाब नहीं हुए तो पथराव किया। यही नहीं गेट तोड़ डाला। ईरान में खाने पीने की चीजों की कीमतें 70% से अधिक बढ़ चुकी थी और इसने लोगों का गुस्सा ईरान सरकार के खिलाफ बढ़ा दिया है।

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विरोध प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं, जिनमें गोलियां चलने की आवाजें सुनाई दे रही हैं और प्रदर्शनकारी “बेशर्म! बेशर्म!” के नारे लगा रहे हैं। ईरान की राजधानी तेहरान में विरोध प्रदर्शन धीमे पड़ गए हैं; हालांकि ये देश के अन्य हिस्सों में फैल गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सबसे तीव्र हिंसा तेहरान से 300 किलोमीटर दूर स्थित अजना में हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है, जब पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद एक व्यापक आंदोलन शुरू हुआ था। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, हिंसा में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के 21 वर्षीय स्वयंसेवक की भी मौत हो गई। हालांकि आईआरएनए ने अधिक जानकारी नहीं दी, लेकिन उसने बताया कि स्वयंसेवक गार्ड के बासिज बल में था।

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लोरिस्तान प्रांत के उप राज्यपाल सईद पौराली ने कहा कि इस शहर में जनव्यवस्था की रक्षा के लिए हुए प्रदर्शनों के दौरान दंगाइयों के हाथों गार्ड का एक सदस्य शहीद हो गया।” उन्होंने आगे कहा, “बासीज के 13 अन्य सदस्य और पुलिस अधिकारी घायल हो गए। ईरानी अधिकारियों ने हिंसा के लिए प्रदर्शनकारियों को दोषी ठहराया है। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों की आवाज़ सुनी जानी चाहिए, लेकिन हिंसा उसका जवाब नहीं हो सकती। पौराली ने कहा, “ये प्रदर्शन आर्थिक दबाव, मुद्रास्फीति और मुद्रा में उतार-चढ़ाव के कारण हुए हैं और आजीविका संबंधी चिंताओं की अभिव्यक्ति हैं। नागरिकों की आवाज़ को सावधानीपूर्वक और समझदारी से सुना जाना चाहिए, लेकिन लोगों को लाभ-लोभी व्यक्तियों द्वारा अपनी मांगों को कुचलने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।

 

 


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