हापुड़ में शुक्रवार को हुई 13 मिमी बारिश से मौसम में ठंडक आई, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई क्षेत्रों में जलभराव के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। कृषि विभाग के अनुसार, इस बारिश का सर्वाधिक असर गेहूं, आलू और सरसों की फसलों पर पड़ा है। हापुड़ में पिछले दो दिनों से अचानक मौसम में बदलाव देखने को मिला। अचानक हुई बारिश से हापुड़ का पारा गिरकर 14 डिग्री तक पहुंच गया। जिससे ठंड का एहसास हुआ। शुक्रवार को शाम तक हापुड़ में रुक-रुक कर बूंदाबांदी होती रही। जिससे लोग घरों में कैद हो गए। लगभग 10 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित जिले में लगभग 4 हजार हेक्टेयर गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। इसके अतिरिक्त, आलू और सरसों की लगभग 5 से 6 हजार हेक्टेयर फसल को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भर जाने से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। किसान ज्ञानेंद्र त्यागी कहना है कि इस समय फसलें पकने की अवस्था में हैं, ऐसे में बारिश और जलभराव से भारी क्षति हो सकती है। विशेष रूप से गेहूं की फसल के गिरने (लॉजिंग) का खतरा बढ़ गया है, जिससे कटाई में भी बाधाएं आ सकती हैं। जिला कृषि अधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि विभाग स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों से पानी की उचित निकासी का प्रबंध करें ताकि नुकसान को कम किया जा सके। मौसम विशेषज्ञों ने शनिवार को भी बारिश की संभावना जताई है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ सकती है।

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