मिथिलांचल का ड्रीम प्रोजेक्ट हसनपुर-सकरी रेल परियोजना का कुशेश्वर पक्षी विहार के कारण रूट बदला गया है। सर्वें का कार्य पूरा होने के बाद जमीन अधिग्रहण का कार्य शुरू कर दिया गया है। अब किसानों के भुगतान के साथ ही इस योजना पर जनवरी 2027 से काम शुरू किया जाएगा। दो सालों के अंदर इसे पूरा कर ट्रेन आवागमन शुरू किया जाएगा। पूर्व मध्य रेलवे के उपमहाप्रबंधक अमरेंद्र कुमार ने इस मामले को लेकर गुरुवार देर शाम मंडल के अधिकारियों के साथ इस पर समीक्षा बैठक की। रेलवे निर्माण विभाग के प्रधान अभियंता जनक राम ने कहा कि इस परियोजना पर कार्य पूरा कर लिया जाता, लेकिन कुशेश्वर पक्षी विहार के कारण योजना का रूट बदला गया है। जिस कारण 79 किलोमीटर की यह योजना अब 81 किलोमीटर की हो गई है। सर्वे का कार्य पूरा होने के बाद भूस्वामी को नोटिस भेजी गई है। पांच से सात महीनों में जमीन अधिग्रहण का कार्य चलेगा। किसानों का भुगतान किया जाएगा। जिसके बाद उम्मीद है कि जनवरी 2027 से इस योजना पर कार्य शुरू हो जाएगा। एक सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि समय के साथ योजना पर खर्च बढता जा रहा है। हसनपुर से बिथान रेलवे लाइन बनकर तैयार है। हसनपुर से आगे रेलवे लाइन बनाने का काम शुरू किया जा रहा है। 21 किलोमीटर होगी दूरी कुशेश्वर पक्षी विहार के कारण रेलवे लाइन पूर्व प्रस्तावित स्थल से दो किलोमीटर दूर पूरब दिशा की ओर बढ़ा दिया गया है। नए रूट पर रेलवे लाइन बनाने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया गया है। रेलवे लाइन का रास्ता बदले जाने के कारण अब हसनपुर से कुशेश्वर स्थान की दूरी 19 किलोमीटर के बदले 21 किलोमीटर हो जाएगी। जिससे योजना की कुल दूरी अब 79 के बदले 81 किलोमीटर की होगी। जिससे पूर्व के बजट के हिसाब से खर्च भी बढेगा। जगह बदले जाने के बावजूद रेलवे स्टेशन का नाम कुशेश्वर स्थान ही रहेगा।
योजना का इतिहास 1951 में योजना के लिए जांच की गई। 1953 में रेलवे बोर्ड ने कहा कि बाढ़ के इलाके में यह संभव नहीं। 1972 में तत्कालीन रेलमंत्री स्व. ललित नारायण मिश्रा ने सर्वे की घोषणा की। इसी बीच समस्तीपुर स्टेशन पर बम विस्फोट में ललित बाबू की हत्या हो गई। इसके बाद इस योजना की फाइल बंद कर दी गई। 1997 में तत्कालीन रेल मंत्री स्व.रामविलास पासवान ने इस योजना को मिथिलांचल के विकास के लिए जरूरी बताते हुए फिर से फाइल खोली और फंड उपलब्ध कराकर शिलान्यास किया। उधर, रामविलास पासवान के रेलमंत्री पद से हटते ही कई वर्षों तक इस योजना को राशि नहीं मिली। लालू प्रसाद के रेल मंत्री बनने पर इस योजना को फंड मिलना शुरू हुआ। लेकिन दिसंबर 2008 में दरभंगा के तत्कालीन डीएफओ दीगंबर ठाकुर द्वारा कुशेश्वर स्थान पक्षी विहार के पास रेलवे लाइन के निर्माण पर रोक लगा दी गई। डीएफओ ने कहा पक्षी विहार के पास से रेलवे लाइन के गुजरने से प्रवासी पक्षी को खतरा है। रेलवे लाइन बनाने की अनुमती नही दी जा सकती। तब से हरनगर से आगे हसनपुर की ओर रेलवे लाइन का निर्माण कार्य बंद कर दिया गया। बाढ़ के समय नाव ही सहारा इस इलाके में रेलवे लाइन के बनने से आवागमन सुलभ होने से विकास की गति तेज होगी। यह इलाका बाढ़ प्रभावित है। साल में छह महीना इस इलाके के लोग बाढ़ की पीड़ा झेलते हैं। लोगों के आवागमन की सुविधा सिर्फ नाव ही बचता है। कोसी-मिथिलांचल की घट जाएगी दूरी इस योजना के पूरा होने पर मिथिलांचल के इस इलाके में विकास के द्वारा खुलेंगे। वहीं, कोसी और मिथिलांचल की दूरी घट जाएगी। रेलवे लाइन से समस्तीपुर के अलावा खगड़िया-दरभंगा के लोगों को लाभ मिलेगा। उधर दक्षिण बिहार के लोगों को मिथिलांचल में आना होगा आसान। 2 फेज में चल रहा काम योजना पर दो चरणों में काम चल रहा है। इसके लिए अलग-अगल उप मुख्य अभियंता काम कर रहे हैं। पहले चरण में सकरी से कुशेश्वर स्थान के कार्य को बांटा गया था। सकरी से हरनगर तक रेलवे लाइन कानिर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। ट्रेन हरनगर तक चल भी रही है। दूसरे चरण में कार्य हसनपुर-कुशेश्वर स्थान की ओर चल रहा है। जिसमें हसनपुर से बिथान रेल परिचालन हो रहा है पहले 79 अब 81 किलोमीटर रेलवे लाइन बनाया जाएगा। 10 रेलवे स्टेशन का होना है निर्माण इस योजना के तहत हसनपुर, बिथान, कौराही, विरौल, कुशेश्वरस्थान, हरनगर, नेडली, बेनीपुर, जगदीशपुर व सकरी को स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। इसके तहत सकरी, कुशेश्वस्थान व हसनपुर को जंक्शन के अलावा चार क्रॉसिंग स्टेशन, 45 रेलवे गुमटी और 82 छोटे-बड़े पुलों का निर्माण होगा।
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