इच्छामृत्यु पाने वाले गाजियाबाद के हरीश राणा की अस्थियों को आज हरिद्वार में गंगा में विसर्जन किया गया। इस मौके पर हरीश के परिवार के सदस्य और रिश्तेदार भी साथ रहे। एक दिन पहले यानी 25 मार्च की सुबह दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट पर सुबह 9.40 बजे छोटे भाई आशीष ने हरीश के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी थी, जहां परिवार के लोगों ने आखिरी बार प्रणाम किया था। भाुवक होकर पिता अशोक राणा (62) ने बेटे हरीश को आखिरी बार प्रणाम करते हुए कहा कि कोई इस समय रोए ना… परिवार के सदस्य सभी साथ रहे लंबे समय से संघर्षरत रहे हरीश राणा के निधन के पश्चात आज उनके पिता अशोक राणा, छोटे भाई आशीष राणा और अन्य परिजन अस्थियां लेने दिल्ली स्थित शमशान घाट पहुंचे। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार पहुंचे। गंगा में अस्थियों का विसर्जन किया गया। इस दौरान हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने भावुक होते हुए सर्वप्रथम सर्वशक्तिमान परमात्मा का धन्यवाद किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रदीवाला एवं न्यायमूर्ति विश्वभ्रातन द्वारा दिए गए मानवीय निर्देशों के लिए भी विशेष आभार व्यक्त किया। सीएम योगी और जिला प्रशासन का आभार हरीश के पिता अशोक राणा ने सीएम योगी आदित्यनाथ का भी हृदय से धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके निर्देश पर जिला प्रशासन, जीडीए के अधिकारियों, आयुक्त एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने घर पहुंचकर हर संभव सहायता प्रदान की। साथ ही सरकार द्वारा 10 लाख की आर्थिक सहायता की घोषणा के लिए भी आभार जताया।
अशोक राणा ने एम्स के निदेशक डॉ. श्रीवास्तव, एचओडी डॉ. सीमा मिश्रा एवं उनकी पूरी टीम, प्रोफेसर डॉ. सुशांत सहित सभी चिकित्सकों का धन्यवाद किया, जिन्होंने उपचार के दौरान निरंतर सहयोग दिया। सभी ने सहयोग दिया हरीश के पिता अशोक राणा ने अधिवक्ता रश्मि नंदकार, डॉ. धनी मेहता, डॉ. सुविता भोडवाला, डॉ. रूप गुरसहानी, डॉ. चंद्रमणि एवं अन्य विशेषज्ञों का भी आभार प्रकट किया। आगे कहा कि इस कठिन समय में मेडिकल टीम, अधिवक्ताओं, पड़ोसियों एवं समाज के लोगों ने हर कदम पर उनका साथ दिया। विशेष रूप से सोसाइटी निवासी अरविंद कुमार, तेजस और अन्य लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने दिन-रात सहयोग करते हुए भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं में सहायता की। परिवार ने सभी सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में मिले सहयोग को वे जीवनभर नहीं भूलेंगे। एम्स में 24 मार्च को हुआ निधन 31 साल के हरीश ने 24 मार्च को दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली थी। वे 13 साल से कोमा में थे। डॉक्टर्स के मुताबिक परिवार ने हरीश के फेफड़े, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किया है। हरीश को एम्स में पैसिव यूथेनेशिया दिया गया। इसका मतलब होता है कि किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए जो बाहरी लाइफ सपोर्ट या इलाज दिया जा रहा है, उसे रोक दिया जाए या हटा लिया जाए, ताकि मरीज की प्राकृतिक रूप से मौत हो सके। इच्छामृत्यु के लिए सुप्रीम कोर्ट गया परिवार सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को 11 मार्च को इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। यह देश का पहला मामला है, जिसमें किसी को इच्छामृत्यु दी गई थी। हरीश को 14 मार्च को गाजियाबाद वाले घर से दिल्ली एम्स में शिफ्ट किया गया। 16 मार्च को हरीश की फीडिंग ट्यूब (खाने की नली) हटा दी थी। 4 तस्वीरें देखिए… हरीश हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरे दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यू्निवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। 2013 में वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। इसकी वजह से उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और वह कोमा में चले गए। वह न कुछ बोल सकते थे और न ही महसूस कर सकते थे। डॉक्टर्स ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया बीमारी से पीड़ित करार दिया था। इसमें मरीज पूरी तरह से फीडिंग ट्यूब यानी खाने-पीने की नली और वेंटिलेटर सपोर्ट पर निर्भर रहता है। इसमें रिकवरी की कोई गुंजाइश नहीं होती। 13 साल से बिस्तर पर पड़े होने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव बन गए थे। उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही थी। यह स्थिति हरीश के लिए बहुत दर्दनाक थी। परिवार के लिए उन्हें ऐसे देखना मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया था। वेंटिलेटर, दवाइयों, नर्सिंग और देखभाल पर 13 साल में इतना खर्च हो चुका था कि परिवार आर्थिक रूप से टूट चुका था। हरीश के परिवार ने सबसे पहले 3 अप्रैल, 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी थी। हालांकि, कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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