कुशीनगर के तमकुहीराज स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान में बुधवार को श्रीहनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे, जिससे पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से भर गया। अयोध्या धाम से पधारीं मानस मर्मज्ञ कथावाचिका साध्वी स्मिता दीदी ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने निष्कपट भक्ति का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि सच्चे मन और समर्पण से की गई भक्ति ही ईश्वर को प्रिय होती है। साध्वी स्मिता ने हनुमान जी और श्रीराम की प्रथम भेंट का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि हनुमान जी सेवा, निष्ठा और समर्पण के सर्वोच्च प्रतीक हैं, जिनसे हमें निस्वार्थ भाव से कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने सुग्रीव मित्रता और बाली वध के प्रसंगों के माध्यम से संदेश दिया कि अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। लंका विजय और रावण वध का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है, जबकि सत्य और धर्म की सदैव विजय होती है। कथा के दौरान पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के गगनभेदी उद्घोष से गूंजता रहा। इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बना, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, भाईचारे और सेवा भावना का संदेश देने में भी सफल रहा।

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