मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने पूरी दुनिया की राजनीति को गर्म कर दिया है। एक तरफ ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान ने इस पूरे मामले में भारत को निशाने पर ले लिया है। दरअसल भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के एक बयान ने इस्लामाबाद में सियासी तूफान खड़ा कर दिया। जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि भारत किसी का दलाल देश नहीं है। पाकिस्तान की सरकार से लेकर वहां के नेताओं तक इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आने लगी और यह आग पाकिस्तानी सरकार के साथ-साथ अब पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार तक पहुंच चुकी है। भारत को लेकर हिना ने क्या कुछ कहा है और पाकिस्तान क्या शांतिदूत बन पाएगा कभी? दरअसल हाल ही में सर्वदलीय बैठक होती है। जयशंकर ने पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष को लेकर पाकिस्तान की मध्यस्था पर सवाल उठाए और कहा कि भारत इस खेल का हिस्सा नहीं है क्योंकि भारत कोई दलाल राष्ट्र बिल्कुल नहीं है।
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आपको याद होगा कि पाकिस्तान जबरदस्ती का शांतिदूत बनने का कोशिशें करते हुए दिखाई दे रहा है। ईरान अमेरिका में सुलह की बातें कर रहा है और उसी बीच भारत के बयान से पाकिस्तान जल भुन गया है। यही बयान पाकिस्तान को नागवार गुजरा। सबसे पहले पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और भारतीय बयान को तिरस्कार के साथ खारिज करते हुए इसे गैर कूटनीतिक बता दिया। लेकिन मामला यहीं नहीं रुकता। पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार भी इस विवाद में कूद पड़ती हैं। सोशल मीडिया पर जयशंकर के बयान की आलोचना करते हुए कहती हैं कि इस तरह की सियासी ड्रामेबाजी पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर रही है और यह दुख की बात है कि पूरा इलाका ऐसे बयानों का बंधक बनता जा रहा है।
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कहीं ना कहीं हिना रब्बानी खार जयशंकर के इस बयान को ड्रामेबाजी बता रही हैं। दरअसल इस पूरे विवाद की जड़ पाकिस्तान की वही कोशिश है जिसमें वह खुद को ईरान और अमेरिका के बीच संभावित मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ अमेरिका से बार-बार करीब जाता है और ईरान को जताता है कि हम आपके दोस्त हैं। इस्लामाबाद चाहता है कि उसकी जमीन पर ईरान और अमेरिकी प्रतिनिधि बैठकर सीज फायर की बातचीत करें। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह इस तरह की मध्यस्था की राजनीति से दूर है। जयशंकर के इसी बयान के बाद से पाकिस्तान के नेताओं में बेचैनी बढ़ गई है और अब बयानबाजी की जंग खुलकर भारत और पाकिस्तान के बीच दिखाई दे रही है।

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