DniNews.Live

हत्या के प्रयास का आरोपी बना BJP महामंत्री:लखनऊ में सरकारी टीचर को बनाया मीडिया प्रभारी; महिलाओं को तवज्जो नहीं

यूपी भाजपा ने कड़ी मशक्कत के बाद जिला कार्यकारिणी बनाई। 2 मार्च तक बनने वाली कार्यकारिणी घोषित होने में 19 दिन और लग गए। मतलब, 21 मार्च को कार्यकारिणी घोषित हो पाईं। फिर भी सीएम योगी के क्षेत्र गोरखपुर के जिलों में कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ। इतनी माथापच्ची के बावजूद घोषित होते ही कार्यकारिणी विवादों में घिर गई है। चौंकाने वाला मामला अयोध्या का है। यहां अटेम्प्ट-टू-मर्डर (हत्या का प्रयास) के आरोपी को महामंत्री बनाया गया है। वो जिले की टॉप-10 अपराधियों में शामिल है। वहीं, लखनऊ में शिक्षा विभाग के सेवा नियमों के खिलाफ जाकर एक सरकारी टीचर को भाजपा का मीडिया प्रभारी नियुक्त कर दिया गया। दरअसल, यूपी में भाजपा ने संगठन को 98 जिलों में बांटा है। सभी में जिला कार्यकारिणी बनाई गई है। वैसे तो 7 महिलाओं को कार्यकारिणी में रखने का नियम है। लेकिन, ललितपुर को छोड़कर किसी भी जिले में यह कोरम पूरा नहीं किया गया है। पढ़िए यह खास रिपोर्ट… भाजपा ने अयोध्या महानगर में शिवेंद्र सिंह को जिला महामंत्री बनाया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शिवेंद्र के खिलाफ हत्या के प्रयास और मारपीट के मुकदमे दर्ज हैं। फैजाबाद जिले के टॉप-10 अपराधियों की लिस्ट में शिवेंद्र का नाम शामिल है। साथ ही, शिवेंद्र को सपा के बागी विधायक अभय सिंह का करीबी बताया जाता है। पार्टी सूत्र कहते हैं कि जिले के बड़े संगठन नेताओं ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक आपत्ति भी जताई थी। लेकिन, प्रदेश स्तर के एक पदाधिकारी के प्रेशर में शिवेंद्र को महामंत्री बना दिया गया था। क्या कहती है भाजपा की गाइडलाइन जिला पदाधिकारी बनने के लिए व्यक्ति को संगठनात्मक दायित्व पर होना चाहिए, जिससे राजनीतिक काम का अनुभव हो सके। शिवेंद्र को लेकर लोकल नेताओं की नाराजगी इसलिए भी है कि उन्हें संगठन का कोई अनुभव नहीं है। दूसरा, जिला इकाई में अभय सिंह का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। वहीं, अयोध्या महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव कहते हैं- मुकदमा दर्ज होने से कोई अपराधी नहीं हो जाता। बाकी जांच तो चल ही रही है। लखनऊ में सरकारी टीचर को बनाया मीडिया प्रभारी लखनऊ जिला टीम में चिंतामणि पांडेय को मीडिया प्रभारी बनाया गया है। वह बाराबंकी के हैदरगढ़ में एक प्राइमरी स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं। शिक्षा विभाग के सेवा नियमों के मुताबिक सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल का पदाधिकारी नहीं हो सकता। चिंतामणि को 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी शलभमणि त्रिपाठी का चुनाव प्रचार करने के आरोप में सस्पेंड भी किया गया था। इस मामले में चिंतामणि का कहना है- परिषद के शिक्षक न तो केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और न राज्य सरकार के। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें ‘गुरु’ का दर्जा दिया है। चुनाव जीतने के बाद ही पद छोड़ना होता है। वहीं, बाराबंकी के बेसिक शिक्षा अधिकारी नवीन कुमार पाठक का कहना है- यह सेवा नियमों के खिलाफ है। कोई भी परिषदीय शिक्षक किसी राजनीतिक दल का पदाधिकारी नहीं बन सकता। भाजपा के सूत्र बताते हैं- सरोजनीनगर से विधायक राजेश्वर सिंह की तरफ से दिए गए नामों को जिला टीम में शामिल ही नहीं किया गया है। चुनाव में उनका विरोध करने वालों को टीम में जगह दे दी गई। अब राजेश्वर सिंह के समर्थकों में नाराजगी है। ललितपुर को छोड़कर कहीं भी महिला कोरम पूरा नहीं
भाजपा की जिला समिति में जिलाध्यक्ष के अलावा 8 उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री, 8 मंत्री समेत 90 पदाधिकारी होते हैं। संगठन की गाइडलाइन के मुताबिक, पदाधिकारियों में कम से कम 7 महिलाएं होना जरूरी हैं। लेकिन, ललितपुर को छोड़कर किसी भी जिले में 7 महिला पदाधिकारी नहीं रखी गई हैं। जिला कार्यकारिणी सदस्यों में भी 30 महिलाओं को रखने का नियम है। हालांकि, ज्यादातर जिलों में ये कोरम भी पूरा नहीं किया गया है। दलित-ओबीसी को सही जगह नहीं
पार्टी ने तय किया था कि जिला टीम में दो पदाधिकारी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से लिए जाएंगे। वहीं, पिछड़े वर्ग के सदस्यों की संख्या जिला के जातीय समीकरण के अनुसार रखी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, कुछ जिलों में जाति छिपाने के लिए बड़ी चुतराई से पदाधिकारी का उपनाम हटाकर ओबीसी या दलित दिखाने का प्रयास किया गया है। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पदाधिकारियों की उम्र 30 से 50 साल के बीच रखने को कहा था। हालांकि, महिलाओं और एससी-एसटी को आयुसीमा से छूट दी गई थी। लेकिन, कई जिलों में 60-65 साल उम्र के भी पदाधिकारी बनाए गए हैं। दूसरी पार्टियों से आए नेता कैडर पर हावी
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, जिला कार्यकारिणी के गठन में विधायकों की सिफारिश को खास तवज्जो दी गई है। उनके दबाव में कहीं-कहीं नियमों की अनदेखी भी की गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी के 30% से ज्यादा विधायक दूसरे दलों से आए हैं। वे विधानसभा क्षेत्रों में संगठन के समानांतर अपनी टीम से काम कराते हैं। अब उनकी टीम के सदस्य ही जिला पदाधिकारी बनने से पार्टी के मूल कैडर कार्यकर्ता पद से वंचित हो गए हैं। पहले 2 मार्च तक बननी थी जिला कार्यकारिणी
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार, सभी जिलों में जिला कार्यकारिणी का गठन 2 मार्च तक होना था। लेकिन, अधिक समय लगने के कारण कार्यकारिणी की घोषणा 20-21 मार्च तक हो सकी। अभी तक काशी, ब्रज, पश्चिम, अवध और कानपुर क्षेत्र के करीब 65 से अधिक जिलों की कार्यकारिणी घोषित हुई है। गोरखपुर क्षेत्र के जिलों में कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… ‘मुसलमानों का एनकाउंटर करने वालों का भी एनकाउंटर होगा’, AIMIM के यूपी अध्यक्ष बोले ‘हमें 111 नहीं, सिर्फ 11 विधायक दे दो तो अपनी ताकत दिखा देंगे। किसी मुसलमान का एनकाउंटर होगा, तो करने वाले का भी एनकाउंटर होगा। केवल 11 विधायक में ही हम अपनी ताकत दिखा देंगे।’ ये बात AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष हाजी शौकत अली ने 23 मार्च को कही। पूरी खबर पढ़ें…

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *