चैत्र नवरात्रि के अवसर पर स्वामी हरिनारायण समदर्शी महाराज विश्व कल्याण के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। नवरात्रि के चौथे दिन उन्होंने पुणे स्थित आराध्य तपोस्थली आश्रम में नौ दिवसीय सतचंडी पाठ और पशुपतार्थ मंत्र के साथ अखंड तपस्या व साधना शुरू की है, जो दिन-रात जारी है। स्वामी हरिनारायण समदर्शी महाराज ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि उनकी प्रार्थना है कि मां भगवती सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करें, उनके जीवन में सुख-समृद्धि आए और कष्टों का नाश हो। उन्होंने यह भी कहा कि मां की कृपा से हर व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। यह अनुष्ठान केवल पुणे में ही नहीं, बल्कि चित्रकूट स्थित सिद्धेश्वर पुरुषार्थ दंडी स्वामी बालक आश्रम और प्रयागराज के अरैल क्षेत्र में भी एक साथ संपन्न हो रहा है। तीनों स्थानों पर पूजन, हवन और विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। स्वामी समदर्शी महाराज पिछले 27 वर्षों से चैत्र प्रतिपदा और शारदीय नवरात्रि के दौरान अखंड सतचंडी अनुष्ठान करते आ रहे हैं। इससे पूर्व उन्होंने गिरनार पर्वत, विंध्याचल, उज्जैन, कामरूप और कामाख्या जैसे प्रमुख शक्तिपीठों में भी विश्व शांति एवं मानव कल्याण के लिए अनुष्ठान किए हैं। पिछले 15 वर्षों से यह आयोजन नियमित रूप से पुणे स्थित तपोस्थली आश्रम में हो रहा है। कोरोना काल के दौरान भी स्वामी समदर्शी महाराज ने महामारी से मुक्ति की कामना के लिए विशेष अनुष्ठान किए थे। उस समय पुणे स्थित आश्रम के समीप हजारों लाल मिर्चों से सिद्ध हवन किया गया था, जिसकी व्यापक चर्चा हुई थी। इसके अतिरिक्त, स्वामी समदर्शी महाराज प्रयागराज के माघ मेला, अर्द्धकुंभ और कुंभ मेले में भी सक्रिय रहते हैं। इन आयोजनों के दौरान वे पूरे माह पूजन-अर्चन के साथ विशाल भंडारे का आयोजन करते हैं, जिसमें लाखों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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