जौनपुर में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा निर्मित फिनायल का उपयोग अब सरकारी विभागों के कार्यालयों में किया जाएगा। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को नया बाजार मिलेगा और उनके कार्यों का भी विस्तार होगा। जिले में कुल 18 हजार स्वयं सहायता समूह गठित हैं, जिनसे लगभग पौने दो लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें से अधिकांश महिलाएं विभिन्न कार्यों में निपुण हैं और अचार, नमकीन से लेकर फिनायल जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने इन समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को सरकारी विभागों में आवश्यकतानुसार आपूर्ति कराने की तैयारी की है। इसके लिए विभागों और समूहों के बीच विधिवत अनुबंध भी किया जाएगा। वर्तमान में, सरकारी विभाग साफ-सफाई के लिए फिनायल बाहर से खरीदते हैं, लेकिन अब इसकी आपूर्ति समूह की महिलाएं करेंगी। एनआरएलएम के उपायुक्त जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बड़ी संख्या में समूह की महिलाएं फिनायल बना रही हैं। उनकी जानकारी सूचीबद्ध की जा रही है और सरकारी विभागों में इनकी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना है। इसी कड़ी में समूहों से जुड़ी महिलाओं को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं। उन्हें बीसी सखी बनाने से पहले खाता खोलने की जानकारी दी गई है, और बड़ी संख्या में महिलाओं को सामुदायिक शौचालयों के संचालन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस पहल से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी केवल घर-गृहस्थी तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं अब अपने दम पर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ रही है।

Leave a Reply