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स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों की योगदान पर इंटरनेशनल सेमिनार:मधेपुरा में कुलपति ने किया उद्घाटन, वक्ताओं ने कहा-आदिवासियों पर शोध करने की जरूरत

मधेपुरा के BNMV कॉलेज में शुक्रवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ हुआ। सेमिनार में भारत के स्वतंत्रता संग्राम, जैव विविधता संरक्षण एवं स्वदेशी पारंपरिक ज्ञान (आईटीके) में आदिवासियों का योगदान विषय पर देश विदेश के विद्वानों ने हाइब्रिड मोड में अपनी बातें रखी। सेमिनार का उद्घाटन BNMU के कुलपति प्रो. बीएस झा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कुलपति ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की नींव आदिवासियों ने ही रखी है। भले ही इतिहास में उन्हें उतना स्थान नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि आदिवासी गौरव वर्ष में आयोजित सेमिनार में आदिवासियों के योगदान को बारीकी से जानने और समझने का अवसर मिलेगा। कुलपति ने कहा कि तिलकामांझी, बिरसा मुंडा सरीखे आंदोलनकारियों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। शोधार्थियों को ओरिजिनल रिसर्च करने की सलाह कुलपति ने कहा कि आदिवासी न सिर्फ स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भूमिका निभाई बल्कि शोषण के खिलाफ भी पहला नींव डाला। आज जरूरत है आदिवासियों के साथ मिलकर रहने की आदिवासियों के योगदान पर बेहतर शोध करने की जरूरत है। सेमिनार के माध्यम से शिक्षक, छात्र और शोधार्थियों को ओरिजिनल रिसर्च करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि कट एंड पेस्ट कर शोध नहीं हो सकता। विनोबा भावे यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. रबिंद्र नाथ भगत ने कहा कि आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को इतिहास में उचित सम्मान नहीं मिला है। आदिवासियों की अक्रमता को देखते हुए अंग्रेजों को झुकना पड़ा। इसके बावजूद वे उपेक्षित हैं। एमएलएसएम कॉलेज दरभंगा के पूर्व प्रधानाचार्य प्रो. विद्यानाथ झा ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण में आदिवासियों का अनमोल योगदान है। इतिहास को आदिवासी की दृष्टि से देखने की जरूरत जेएनयू में हिंदी ट्रांसलेशन सेंटर के डॉ. गंगा सहाय मीणा ने कहा कि भारतीय इतिहास को आदिवासी की दृष्टि से देखने की जरूरत है। स्वतंत्रता आंदोलन, जैव विविधता संरक्षण स्वदेशी पारंपरिक ज्ञान औपनिवेशिक शासन से मुक्ति सबसे पहले आदिवासियों ने शुरू किया था। सेमिनार आयोजन समिति के अध्यक्ष सह प्रधानाचार्य प्रो. संजीव कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने सेमिनार के औचित्य पर प्रकाश डाला। प्रधानाचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमृत भारत योजना के तहत इस वर्ष को आदिवासी गौरव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।


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