भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारियों ने GST विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद दोनों खाते तुरंत खोल दिए गए। प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र के नेतृत्व में पदाधिकारी लखनपुर स्थित कार्यालय पहुंचे और अपर आयुक्त ग्रेड-वन वी पी राम से वार्ता की। ज्ञानेश मिश्रा ने बतााया कि कैप्टन सुरेंद्र सिंह के बैंक खाते उनकी पेंशन से जुड़े निजी खाते हैं, जिनका 15 साल पहले बंद हो चुकी फर्म से कोई संबंध नहीं है। बिना नोटिस खातों को सीज करना नियम विरुद्ध है।
15 साल पुराना मामला, नहीं मिला कोई नोटिस
ज्ञानेश मिश्र ने बताया कि वर्ष 2010-11 के वैट मामले में करीब 4.21 लाख रुपए बकाया का एक्स-पार्टी केस बताया जा रहा है, लेकिन कैप्टन को आज तक न कोई नोटिस मिला और न ही कोई आदेश की जानकारी दी गई। उनका पता विभाग में दर्ज होने के बावजूद उन्हें सूचित नहीं किया गया।
कैप्टन सुरेंद्र सिंह, जो भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी और NSG कमांडो रह चुके हैं, वर्ष 2009 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक बिस्कुट एजेंसी चलाई, लेकिन घाटे के चलते बंद कर दी। वर्तमान में वे पेंशन पर ही निर्भर हैं।
खाते सीज होने से बढ़ी परेशानी
खातों के सीज होने के बाद वे इंदौर में थे और ऑनलाइन लेनदेन बंद हो गया। उन्हें उधार लेकर वापस कानपुर आना पड़ा।
वार्ता के दौरान ही खुले खाते
अधिकारियों से बातचीत के दौरान ही GST विभाग ने दोनों बैंक खाते खोल दिए। अपर आयुक्त वी.पी. राम ने आश्वासन दिया कि फाइल मिलने पर मामले को धारा-32 में खोलकर उचित समाधान किया जाएगा।

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