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सैफई विवि दुष्कर्म केस में जांच रिपोर्ट सौंपी:इटावा में 28 मार्च को कार्यकारिणी परिषद लेगी बड़ा फैसला

इटावा के उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में मानसिक रूप से असमर्थ महिला के साथ दुष्कर्म के मामले में जांच का अहम चरण पूरा हो गया है। नौ सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और अब 28 मार्च को कार्यकारिणी परिषद की बैठक में दोषियों पर सख्त कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा। आरोपी की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है और पीड़िता का इलाज जारी है। जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद आगे की कार्रवाई तय विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार चिकित्सा संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ आदेश कुमार की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने पूरे मामले की गहराई से जांच कर सीलबंद रिपोर्ट सौंप दी है। कुलसचिव दीपक वर्मा ने बताया कि अब इस रिपोर्ट के आधार पर 28 मार्च को होने वाली कार्यकारिणी परिषद की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। तीन घंटे चली बैठक में बनी रणनीति मंगलवार को विश्वविद्यालय प्रशासन की करीब तीन घंटे तक चली बैठक में जांच रिपोर्ट के हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में दोषियों की जिम्मेदारी तय करने और सख्त कार्रवाई की रणनीति तैयार की गई है। कुलपति स्तर से साफ निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई होगी। प्रशासन का दावा, जीरो टॉलरेंस नीति लागू जारी प्रेस नोट में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सात प्रमुख बिंदुओं के जरिए स्थिति स्पष्ट की है। इसमें बताया गया है कि घटना सामने आते ही मुकदमा दर्ज कराया गया, आरोपी सफाई कर्मी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और पीड़िता के सभी मेडिकल परीक्षण कराए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। पीड़िता का इलाज जारी, निगरानी में मेडिकल बोर्ड पीड़िता की हालत को देखते हुए उसके इलाज में किसी प्रकार की कमी न रहे, इसके लिए मेडिकल बोर्ड की निगरानी में लगातार उपचार किया जा रहा है। सभी जरूरी चिकित्सकीय जांच पूरी कर ली गई हैं और डॉक्टरों की टीम उसकी सेहत पर नजर बनाए हुए है। मानसिक रोग विभाग में भर्ती करीब 38 वर्षीय महिला, जो बोलने और समझने में असमर्थ है, के गर्भवती होने की पुष्टि 17 मार्च को रूटीन जांच के दौरान हुई थी। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ। प्रारंभिक जांच में सफाई कर्मी रविंद्र कुमार बाल्मीकि को आरोपी बनाया गया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागाध्यक्ष को पद से हटा दिया और संबंधित वार्ड में तैनात एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को भी हटाया गया। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी, जिसने अब अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्त और ठोस कार्रवाई होगी या मामला औपचारिकता तक सीमित रह जाएगा। 28 मार्च को होने वाली बैठक इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी और उसी दिन यह साफ हो जाएगा कि दोषियों पर कितनी बड़ी कार्रवाई होती है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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