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सेंट्रल मार्केट प्रकरण में फिर टली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई:मेरठ में ध्वस्तीकरण से बचने के लिए सेटबैक के तहत दुकानें तोड़ रहे व्यापारी

मेरठ की सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर अभी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक और जहां सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि आवासीय प्लॉट में चल रहे कार्मशियल प्रतिष्ठानों को ध्वस्त किया जाए। वहीं दूसरी और आवास विकास द्वारा भू उपयोग बदलने के लिए शमन शुल्क जमा कर सेटबैक के तहत दकानें रखने का नोटिस भी व्यापारियों को मिला है। इसी असमंजस के बीच सुप्रीम कोर्ट में जो सुनवाई बुधवार को होनी थी वह अब 1 मार्च के लिए टाल दी गई है , हालांकि तारीख में अभी बदलाव हो सकता है।
शमन शुल्क जमा कर तोड़ रहे दुकानें आवास विकास से मिले भू उपयोग बदलने के नोटिस के बाद शमन कुछ व्यापारियों द्वारा शुल्क जमा जमा भी करा दिया गया है। इसके साथ ही आदेश में आए सेटबैक के नियम का पालन करने के लिए व्यापारी अपनी दुकानें तोड़ भी रहे हैं। उनका मानना है कि नियमानुसार दुकानों को तैयार करने के बाद वह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बच जाएंगे। 80 भू- खंड़ को मिला नोटिस आवास विकास की और से मार्केट के व्यापारियों को भू उपयोग बदलने के लिए शमन शुल्क जमा कर सेटबैक के तहत दुकानों को पीछे करने का भी नोटिस दिया है। इसके बाद भी अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है क्योंकि ध्वस्तीकरण का आदेश सुप्रीम कोर्ट का है। जनप्रतिनिधियों ने भी साधी चुप्पी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अवमानना से बचने के चलते कोई भी जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी व्यापारियों को इस बात से आश्वस्त नहीं कर पा रहा है कि सेटबैक के तहत दुकानों को करने के बाद उनके प्रतिष्ठान सुरक्षित हैं। 30 साल से ज्यादा सालों से चल रहा प्रकरण सेंट्रल मार्किट के आवासीय प्लॉटों पर हुई व्यावसायिक गतिविधियों को शुरु से ही रुकवाने का प्रयास हुआ लेकिन आवास एवं विकास परिषद रुकवा पाने में नाकाम रहा। लगभग 30 साल बाद 17 दिसंबर, 2024 को लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट ने 661/6 भूखंड व उसकी तर्ज पर बने निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश जारी कर दिए। तनाव बढ़ता चला गया और 25 अक्टूबर, 2025 को आवास एवं विकास परिषद ने पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर 22 दुकानों को ध्वस्त कर दिया।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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