बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने कृष्णाब्रह्म में बिहार की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर वोट की चोरी हुई थी, जिसके बल पर चुनाव जीता गया। सांसद ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के हालिया बयान ने उनके इन दावों को सही साबित किया है। सिंह ने शुक्रवार को सत्ताधारी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वे पहले से ही इस आशंका को जताते आ रहे थे। उन्होंने इसे एक चिंताजनक स्थिति बताया कि सरकार में शामिल नेता स्वयं चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी स्वीकार कर रहे हैं। ”चुनाव ही निष्पक्ष नहीं होंगे, तो स्वच्छ और मजबूत लोकतंत्र की स्थापना कैसे संभव” सांसद ने सवाल उठाया कि जब चुनाव ही निष्पक्ष नहीं होंगे, तो स्वच्छ और मजबूत लोकतंत्र की स्थापना कैसे संभव है। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र की बुनियाद निष्पक्ष चुनाव पर टिकी होती है, लेकिन बिहार में सत्ता के बल पर जनमत का अपहरण किया गया है। इसे जनता के अधिकारों का खुला हनन बताया गया। सुधाकर सिंह ने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होगी, तो न तो ईमानदार सरकार बन सकती है और न ही जनता का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर कायम रह सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ने प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर जनता की आवाज दबाने का प्रयास किया है, जिससे आम लोगों का लोकतंत्र से विश्वास उठना स्वाभाविक है। ”लोकतंत्र केवल बिहार में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में खतरे में” सांसद सिंह ने यह भी कहा कि लोकतंत्र केवल बिहार में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में खतरे में है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनता ने समय रहते आवाज नहीं उठाई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि एक बड़े जनआंदोलन की आवश्यकता पर बल दिया। सिंह ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है। जब उसकी आवाज को दबाने की कोशिश की जाती है, तो आंदोलन ही आखिरी रास्ता बचता है। उन्होंने दावा किया कि जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका करारा जवाब देगी। ”सच ज्यादा दिनों तक दबाया नहीं जा सकता” उन्होंने भरोसा जताया कि सच ज्यादा दिनों तक दबाया नहीं जा सकता और लोकतंत्र की जीत अंततः जनता की जीत होगी। सांसद सुधाकर सिंह के इस बयान के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उनके समर्थकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है, वहीं सत्ताधारी दल के नेताओं की ओर से भी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को और गरमा सकता है।
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