मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में मंगलवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें धर्म, साहित्य और समाज के विभिन्न पहलुओं पर गहन मंथन हुआ। कार्यक्रम में देशभर से आए विद्वान, शोधार्थी और प्रख्यात वक्ताओं ने सहभागिता की। संगोष्ठी का मुख्य विषय धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता पर केंद्रित रहा। वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि धर्म और साहित्य समाज को जोड़ने का माध्यम हैं, जो आपसी भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आध्यात्मिकता पर विशेष रूप से चर्चा की गई कार्यक्रम के दौरान उर्दू साहित्य में निहित धार्मिक मूल्यों, सहिष्णुता और आध्यात्मिकता पर विशेष रूप से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि उर्दू साहित्य ने हमेशा समाज को जोड़ने और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने का कार्य किया है। इसके साथ ही वर्तमान समय में धार्मिक संवाद की आवश्यकता और उसकी प्रासंगिकता पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। समझ और विश्वास को मजबूत कर सकता विशेषज्ञों ने कहा- बदलते सामाजिक परिवेश में संवाद ही वह माध्यम है, जो विभिन्न समुदायों के बीच समझ और विश्वास को मजबूत कर सकता है। आयोजकों ने बताया कि इस तरह की संगोष्ठियां समाज में एकता, समरसता और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए।

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