सीतामढ़ी में नगर क्षेत्र के नालों से निकलने वाला पानी किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। लखनदेई नदी पर बने प्रेमनगर बीयर में संग्रहित इस पानी से डुमरा व रुन्नीसैदपुर प्रखंड के छह गांवों के करीब 500 किसानों की 800 हेक्टेयर भूमि की नि:शुल्क सिंचाई हो रही है। इसके कारण इस क्षेत्र में सालों भर फसल लहलहाती रहती है। नगर के बीच से गुजरने वाली लखनदेई नदी पर बने प्रेमनगर बीयर में प्रतिदिन नगर के नालों से उत्सर्जित पानी संग्रहित होता है। यहां से नाला और नहर के माध्यम से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। नगर से बीयर की दूरी अधिक होने के कारण नालों का गंदा पानी रास्ते में काफी हद तक स्वच्छ हो जाता है, जिससे किसान बिना किसी खर्च के सिंचाई कर पा रहे हैं। 2020 में 3.32 करोड़ से हुआ था जीर्णोद्धार पूर्व में बने प्रेमनगर बीयर का वर्ष 2020 में 3 करोड़ 32 लाख 41 हजार 400 रुपए की लागत से जीर्णोद्धार किया गया था। इसके बाद बाढ़ और बारिश के मौसम के बाद भी नगर के नालों का पानी पूरे वर्ष बीयर में संचित रहने लगा है। इसी का लाभ आसपास के किसान उठा रहे हैं। इस बीयर से लगमा, प्रेमनगर, भाले, गाढ़ा, मानिक चौक और मलमला गांवों के किसान निःशुल्क सिंचाई सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। नगर के बाद डुमरा से प्रेमनगर बीयर की दूरी करीब नौ किलोमीटर है। 45 किलोमीटर में सूखी रहती है लखनदेई नदी लखनदेई नदी नेपाल के शिवालिक पहाड़ियों से निकलती है और करीब 300 किलोमीटर की दूरी तय कर सोनबरसा प्रखंड के बड़ी भारसर से भारत में प्रवेश करती है। इसके बाद यह खाप, दुलारपुर, मुंहचट्टी पिपरा, साहपुर शीतलपट्टी, सहियारा, बदुरी, कोदवारा, फुलपरासी, धुम्हर, बखरी, सुक्राहर, नराहा, सिंगरहिया, पुरनहिया, हरकेश, किशनपुर, झलसी, हरनहिया, बलुआ, हनुमाननगर, सिरौली, कपरील व भवदेपुर होते हुए करीब 45 किलोमीटर की दूरी तय कर नगर क्षेत्र में प्रवेश करती है। बताया जाता है कि लखनदेई नदी में केवल बाढ़ और बारिश के बाद ही कुछ दिनों तक पानी रहता है, जबकि शेष समय नदी सूखी रहती है। ऐसे में प्रेमनगर बीयर में संचित पानी किसानों के लिए जीवनरेखा बना हुआ है।
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