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सिलेंडर की किल्लत, बंद हुए चीला, आलू-टिक्की जैसे फूड आइटम्स:रेस्टोरेंट-कैफे के व्यापार पर 50% तक असर, प्रतिष्ठानों में कम करना पड़ रहा स्टाफ

आगरा में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत और कमी का सीधा असर ढाबा, रेस्टोरेंट और कैफे कारोबार पर पड़ा है। व्यापारियों के अनुसार कारोबार में करीब 50% तक गिरावट आई है, जिसके चलते उन्हें स्टाफ कम करना पड़ा है और कई गैस पर बनने वाले फूड आइटम्स भी बंद करने पड़े हैं। शहर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और अनियमित सप्लाई से फूड कारोबार संकट में है। पहले करीब 1700 रुपए में मिलने वाला सिलेंडर अब 3000 से 3500 रुपए तक पहुंच गया है, जिससे लागत बढ़ने के कारण व्यापारियों को मेन्यू में कटौती करनी पड़ रही है। कई ढाबों और रेस्टोरेंट्स ने आलू टिक्की, आलू चाट, चीला, डोसा और पराठे जैसे आइटम्स बंद कर दिए हैं। वहीं अधिक गैस में बनने वाली मिठाइयों और स्नैक्स जैसे समोसा, कचौड़ी और ढोकला का उत्पादन भी घटा दिया गया है। ब्रिज रसायनम के संचालक उमेश गुप्ता ने बताया कि सिलेंडर की कीमत बढ़ने और समय पर उपलब्ध न होने से बिक्री पर बड़ा असर पड़ा है, जिसके चलते उन्हें 5–6 कर्मचारियों को हटाना पड़ा। शहर के प्रमुख प्रतिष्ठान देवी राम भगत हलवाई में भी मेन्यू सीमित किया गया है। संचालक अखिल के अनुसार, ज्यादा गैस खपत वाले फूड आइटम्स को कम करना मजबूरी हो गया है ताकि खर्च नियंत्रित रखा जा सके। हलवाइयों और प्रतिष्ठानों के मालिकों का कहना है कि सिलेंडर इतनी ऊंची कीमत पर मिल रहे हैं कि उन्हें खरीद पाना मुश्किल हो रहा है। इसी वजह से उन्हें फूड आइटम्स कम करने और कई चीजें बंद करने का फैसला लेना पड़ा है। कारोबारियों का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले शादी सीजन में केटरिंग और मिठाई कारोबार पर और बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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