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​सिर्फ शरीर नहीं, अब मन भी स्वस्थ रहेगा:जच्चा-बच्चा अस्पताल में शहर का पहला वुमेंस वेलनेस सेंटर खुलेगा, काउंसलिंग से घबराहट दूर होगी


                 ​सिर्फ शरीर नहीं, अब मन भी स्वस्थ रहेगा:जच्चा-बच्चा अस्पताल में शहर का पहला वुमेंस वेलनेस सेंटर खुलेगा, काउंसलिंग से घबराहट दूर होगी

​सिर्फ शरीर नहीं, अब मन भी स्वस्थ रहेगा:जच्चा-बच्चा अस्पताल में शहर का पहला वुमेंस वेलनेस सेंटर खुलेगा, काउंसलिंग से घबराहट दूर होगी

आज के दौर में महिलाएं घर की जिम्मेदारी और नौकरी के दोहरे बोझ के बीच जिस तरह तालमेल बिठा रही हैं, उसका सीधा असर उनकी मानसिक सेहत पर पड़ रहा है। खासकर गर्भावस्था के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद महिलाएं भारी तनाव, नींद की कमी और एंग्जायटी यानी घबराहट जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। महिलाओं की इन्हीं अनकही तकलीफों को दूर करने के लिए जच्चा-बच्चा अस्पताल में एक अनूठी पहल की गई है। यहां शहर का पहला ‘वुमेंस वेलनेस सेंटर’ शुरू होने जा रहा है, जहाँ अब महिलाओं के शारीरिक इलाज के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। हफ्ते में दो दिन मनोरोग विशेषज्ञ करेंगे समाधान स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने बताया कि,अस्पताल की ओपीडी में आने वाली और वार्ड में भर्ती होने वाली महिलाओं में मानसिक तनाव के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसी जरूरत को देखते हुए एलएलआर अस्पताल के मनोरोग विभाग के सहयोग से यह सेंटर शुरू किया जा रहा है। अभी यह सेंटर हफ्ते में दो दिन, मंगलवार और शुक्रवार को संचालित होगा। यहाँ मनोरोग विभाग के दो वरिष्ठ कंसल्टेंट विशेष रूप से मौजूद रहेंगे, जो ओपीडी और एडमिट मरीजों की मानसिक समस्याओं का निदान करेंगे। हार्मोनल बदलाव और भागदौड़ बनी तनाव की बड़ी वजह एलएलआर अस्पताल के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय पांडे का कहना है,कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के शरीर की बनावट अलग होती है और उनमें हार्मोनल बदलाव बहुत अधिक होते हैं। मासिक धर्म से लेकर गर्भावस्था तक, शरीर कई तरह के उतार-चढ़ाव से गुजरता है। अक्सर देखा गया है,कि डिलीवरी के बाद मां को सोने का पर्याप्त समय नहीं मिलता, जिससे मानसिक परेशानियां उत्पन्न होती हैं। बातचीत और थेरेपी से दूर होगा मन का बोझ
सेंटर की कार्यप्रणाली के बारे में डॉक्टरों का कहना है,कि हर मामले में दवा की जरूरत नहीं होती है। यहां आने वाली महिलाओं की काउंसलिंग की जाएगी और यदि समस्या सामान्य है तो उसे सीबीटी (कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी) और साइकोथेरेपी यानी बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश होगी। यदि स्थिति गंभीर होती है और मेडिकेशन की जरूरत पड़ती है, तो विशेषज्ञ केवल वही दवाएं देंगे जो गर्भावस्था या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां और बच्चे दोनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हों।

जंक फूड से दूरी और योग पर रहेगा विशेष जोर
वेलनेस सेंटर में महिलाओं को स्वस्थ जीवनशैली के लिए भी गाइड किया जाएगा। गर्भावस्था के दौरान अक्सर चटपटा और जंक फूड खाने की इच्छा होती है, लेकिन डॉक्टरों की सलाह है कि इस समय पौष्टिक आहार ही लेना चाहिए। सेंटर पर महिलाओं को योग और मेडिटेशन के महत्व के बारे में बताया जाएगा, क्योंकि मानसिक शांति के लिए ये सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीके हैं। अब महिलाओं को अपनी मानसिक समस्याओं के लिए यहाँ-वहाँ भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि प्रसूति विभाग में ही उन्हें हर उलझन का समाधान मिल सकेगा।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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