सिद्धार्थनगर में 27 मार्च को महिला सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए ‘रन फॉर एम्पावरमेंट’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ में पुलिस विभाग, छात्र-छात्राओं, महिलाओं और आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ का शुभारंभ किया। यह दौड़ थाना सिद्धार्थनगर परिसर से शुरू होकर पुलिस लाइन तक पहुंची, जहां समापन पर प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। आयोजकों ने संदेश दिया कि महिलाओं के सुरक्षित और आत्मनिर्भर होने पर ही समाज सशक्त और प्रगतिशील बन सकता है। इस दौड़ के जरिए बालिकाओं और महिलाओं को निर्भीक होकर आगे बढ़ने, अपने अधिकारों को पहचानने और आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। दौड़ के दौरान और समापन स्थल पर अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को महिला सुरक्षा से संबंधित कानूनों, हेल्पलाइन नंबरों और आत्मरक्षा के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने लोगों से किसी भी आपात स्थिति में तत्काल पुलिस सहायता लेने और घटनाओं को छिपाने के बजाय खुलकर सामने आने का आग्रह किया, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके। बच्चों ने लिया भाग अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद ने इस अवसर पर कहा कि महिला सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अपनाएं और किसी भी अपराध या उत्पीड़न की जानकारी तुरंत अधिकारियों को दें। इस कार्यक्रम में क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान (IPS) और प्रतिसार निरीक्षक बी.एन. गुप्ता भी उपस्थित रहे। जनपद की महिला पुलिसकर्मियों, पुलिस परिवार की महिलाओं, बच्चों और विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिला सुरक्षा के प्रति किया जागरुक दौड़ के समापन पर प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने इस अवसर पर सभी से यह भी अपील की कि वे अपने परिवार, मोहल्ले और समाज में महिला सुरक्षा और सम्मान के प्रति जागरूकता फैलाएं, ताकि एक सुरक्षित और बेहतर समाज का निर्माण किया जा सके। इस आयोजन ने न सिर्फ महिला सशक्तिकरण के संदेश को मजबूती दी, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी की भावना को भी बढ़ावा देने का कार्य किया।

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